अनदेखी. सड़क किनारे नियम को ताक पर रख चल रहे क्रशर प्लांट
शिकारीपाड़ा के सरसडंगाल से मौलिक्षा गेट तक हैं दर्जनाें क्रशर
दोपहिया वाहन से मलूटी जानेवाले पर्यटकों को होती है परेशानी
पहल की उठी मांग
दुमका : टेराकोटा शैली के ऐतिहासिक मंदिरों के लिए विश्वविख्यात मलूटी गांव पहुंचनेवाले को क्रशर प्लांटों से उड़ने वाले धूल-धक्कड़ का सामना करना पड़ता है. कार से जानेवालों को तो राहत है. वे शीशे चढ़ा कर और एसी ऑन कर चले जाते हैं. पर दोपहिया वाहन से आने-जानेवालों को धूल फांकना पड़ता है.
सड़क के किनारे चंद मीटर के फासले पर बड़ी तादाद में ऐसे क्रशर प्लांट नियम-कानून व पर्यावरणीय शर्तों को धत्ता बता कर चल रहे हैं. हाल शिकारीपाड़ा के सरसडंगाल से ही नहीं कालीपाथर और मौलिक्षा गेट से लेकर मलूटी गांव के प्रवेश मार्ग तक है. एक-दो नहीं दर्जनों क्रशर प्लांट दिन के उजाले में 25 से 25 मीटर की दूरी पर चल रहे हैं.
उड़ते धूल कण से मलूटी आनेवाले पर्यटकों के साथ साथ ग्रामीणों को भी काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. सरकार एक तरफ मलूटी विश्व विख्यात पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहती है. वहीं यहां आनेवाले पर्यटक ही निराश होकर जा रहे हैं. ऐसे में यहां के प्रशासनिक छवि भी धूमिल होने का खतरा बना हुआ है.
सड़क से 100 मीटर की दूरी पर क्रशर संचालन का है निर्देश
25 मीटर की दूरी पर संचालित हो रहा है क्रशन प्लांट
छठ बाद होगी कार्रवाई
शर्तों के मुताबिक क्रशर प्लांट मुख्य सड़क से 100 मीटर की दूरी पर ही होना चाहिए. अगर इससे कम दूरी पर प्लांट चल रहे हैं. धूल उड़ाया जा रहा है तथा शर्तों का अनुपालन नहीं हो रहा है, तो ऐसे प्लांट चलानेवालों पर कार्रवाई होगी. ऐसे प्लांट बंद कराये जायेंगे. छठ के बाद ऐसे प्लांट पर कार्रवाई को लेकर अभियान चलाया जायेगा.
दिलीप कुमार तांती, जिला खनन पदाधिकारी
श्वास संबंधी बीमारी होने का बना रहता है खतरा, पर्यटकों ने की प्रशासन से पहल करने की मांग
तारापीठ में दर्शन के बाद मां तारा की बड़ी बहन मां मौलिक्षा के दर्शन की अभिलाषा श्राद्धालुओं को होती है. उड़ती धूल के कारण अधिकांश श्रद्धालु मलूटी नहीं पहुंच पाते हैं. इसकी रोकथाम की पहल होनी चाहिए
– सुमन चटर्जी, आसनसोल, पश्चिम बंगाल
धूल से श्वास संबंधी बीमारी होने की आशंका से श्रद्धालु भयभीत रहते हैं. इससे अधिकांश श्रद्धालु को मां मौलिक्षा के दर्शन पूजन से वंचित रहना पड़ा है. इसकी रोकथाम की पहल हो, तभी पर्यटन का विकास हो सकेगा.
– पूर्णिमा दास, बर्नपुर, पश्चिम बंगाल
पर्यटन विकास तभी होगा, जब वहां आने-जाने में पर्यटकों को सुविधा मिलेगी. एक तो मलूटी में आने-जाने के लिए कोई पब्लिक ट्रांसपोर्ट सिस्टम नहीं है. दूसरा इतना डस्ट उड़ता है कि आने की हिम्मत लोग नहीं कर पाते.
– विजन दत, मोलेसर
क्रशर प्लांट से इस क्षेत्र के लोगों को रोजगार मिला है, पर इसका मतलब यह नहीं है कि आनेवालों की सुविधा का ख्याल नहीं रखा जाये. डस्ट किसी भी वाहन को हादसे का शिकार बनाने के लिए काफी है.
राकेश सौदागर, रामपुरहाट
