चेतावनी. एक्ट संशोधन के खिलाफ आंदोलन का आह्वान
नक्सली बंदी का असर दुमका के गोपीकांदर क्षेत्र में भी हुआ है. एसएसबी जवानों की मुश्तैदी के बावजूद बूढ़ीचापड़ जंगल से आकर छतरचुआं के एक विद्यालय और जीतपुर मोड़ के पास पोस्टरबाजी कर पुलिस दमन के खिलाफ प्रतिवाद का आह्वान किया है. पोस्टर कम्यूनिस्ट पार्टी माओवादी के नाम जारी किये गये हैं.
दुमका : बिहार-झारखंड में नक्सली बंदी का असर दुमका के गोपीकांदर क्षेत्र में देखने को मिला है.नक्सलियों ने छतरचुआं के एक विद्यालय और जीतपुर मोड़ के पास आधा दर्जन पोस्टर चिपकाये थे. लाल स्याही से लिखे इन पोस्टरों में सीएनटी और एसपीटी एक्ट में संशोधन करनेवाले अध्यादेश के खिलाफ आदिवासी-मूलवासी समेत तमाम मेहनतकश झारखंड की जनता प्रतिवाद व जन प्रतिरोध आंदोलन के निर्माण में आगे आने, पुलिस दमन के विरोध में आम लोगों को तैयार होने जैसी बात कही गयी थी.
ये सभी पोस्टर भारत की कम्यूनिस्ट पार्टी माओवादी के नाम से जारी किये गये थे. अहले सुबह ग्रामीणों ने इन पोस्टरों को देखा तो पुलिस को जानकारी दी गयी, जिसके बाद पोस्टर जब्त कर लिये गये. कहा जा रहा है कि पोस्टरबाजी करने वालों की संख्या तकरीबन दो दर्जन थी और वे पोस्टर चिपकाने के बाद बूढ़ीचापड़ जंगल की ओर चले गये थे. इधर नक्सल प्रभावित प्रखंड शिकारीपाड़ा, रामगढ़, मसलिया, काठीकुंड और गोपीकांदर में बीते देर रात से पुलिस का सर्च अभियान चलता रहा. एसएसबी के जवान भी पूरी रात नजर रखे थे. शिकारीपाड़ा में पत्थर उद्योग पर बंद बेअसर रहा.
