सदर अस्पताल परिसर स्थित सरकारी क्वार्टरों से अवैध कब्जा हटाने को लेकर शुक्रवार को जमकर हंगामा हुआ. इस दौरान इन क्वार्टरों में अवैध रूप से रह रहे लोगों और जिनके नाम से उक्त क्वार्टर आवंटित हैं, उनके व उनके परिजनों के बीच हाथापाई तक हो गयी. सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह स्थिति को नियंत्रित किया. इसके बाद पुलिस की सख्ती पर उक्त क्वार्टरों से अवैध कब्जा हटाया गया और आवंटित कर्मियों को सौंपा गया.
क्वार्टरों में अवैध तरीके से रह रहे थे 37 कर्मी
सदर अस्पताल के इन क्वार्टरों में बाहरी लोग नहीं, बल्कि स्वास्थ्य विभाग से जुड़े कर्मी ही रह रहे थे. इनमें एएनएम और अन्य कर्मचारी शामिल हैं. हालांकि इन कर्मियों को उक्त क्वार्टर आवंटित नहीं किये गये थे. कई बार नोटिस के बाद भी वे क्वार्टर खाली नहीं कर रहे थे. इससे वास्तविक हकदार कर्मियों को आवास नहीं मिल पा रहे थे. ऐसे में सिविल सर्जन डॉ आलोक विश्वकर्मा ने 37 कर्मियों की सूची सार्वजनिक की थी, जो इन क्वार्टरों में अवैध रूप से रह रहे थे. अवैध कब्जा हटाने को लेकर सिविल सर्जन ने धनबाद थाना को पत्र लिखकर प्रशासनिक सहयोग भी मांगा था.
पहले कहा-सुनी, फिर होने लगी हाथापाई
यहां जिन कर्मियों को विधिवत रूप से क्वार्टर आवंटित किये गये थे, वे और उनके परिजन शुक्रवार को एक महिला संगठन के साथ क्वार्टर खाली कराने पहुंचे थे. इस दौरान अवैध रूप से रह रहे लोगों और क्वार्टर पाने वाले कर्मियों के परिजनों के बीच कहासुनी शुरू हो गयी. बात बढ़ने पर दोनों पक्षों के बीच धक्का-मुक्की और हाथापाई होने लगी. मामला बढ़ता देख स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी. इसके बाद पुलिस ने पहुंचकर स्थिति को नियंत्रित किया और अवैध रूप से क्वार्टरों में रह रहे लोगों को तत्काल परिसर खाली करने का निर्देश दिया. पुलिस की मौजूदगी में देर शाम तक आठ क्वार्टरों से अवैध कब्जा हटाकर उन्हें आवंटित कर्मियों को सौंप दिया गया.
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