झारखंड के जननायक एके राय की सातवीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब, नेताओं ने दी भावभीनी श्रद्धांजलि

धनबाद में जननेता, पूर्व सांसद स्वर्गीय एके राय की सातवीं पुण्यतिथि पर एक भावुक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया. विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और बड़ी संख्या में आम लोगों ने उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें नमन किया.


धनबाद से प्रतीक पोपट की रिपोर्ट

Dhanbad News: झारखंड के जननेता, पूर्व सांसद और पूर्व विधायक स्वर्गीय एके राय की सातवीं पुण्यतिथि पर मंगलवार को धनबाद में भावुक माहौल देखने को मिला. नूतनडीह मोड़ स्थित केंद्रीय अस्पताल परिसर के समीप स्थापित उनकी प्रतिमा स्थल पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, मजदूर संगठनों के प्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में आम लोगों ने पहुंचकर उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित किए. कार्यक्रम के दौरान एके राय के संघर्षपूर्ण जीवन, सादगी और जनसेवा के प्रति उनके समर्पण को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि उनके विचार आज भी समाज और राजनीति को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं.

प्रतिमा पर माल्यार्पण कर दी गई श्रद्धांजलि

एके राय स्मारक समिति की ओर से आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम की शुरुआत उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण से हुई. इस अवसर पर निरसा विधायक अरूप चटर्जी, टुंडी विधायक मथुरा महतो, कांग्रेस नेता वैभव सिन्हा, समिति के अध्यक्ष हरिप्रसाद पप्पू सहित कई जनप्रतिनिधियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया. उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत नेता को श्रद्धांजलि दी और उनके अधूरे सपनों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया. कार्यक्रम में बड़ी संख्या में मजदूर, किसान, छात्र, बुद्धिजीवी और आम नागरिक भी शामिल हुए. श्रद्धांजलि सभा के दौरान एके राय के जीवन से जुड़े कई प्रेरणादायक प्रसंगों को साझा किया गया, जिन्होंने उपस्थित लोगों को भावुक कर दिया.

नई पीढ़ी तक पहुंचाने का लिया संकल्प

श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए निरसा विधायक अरूप चटर्जी ने कहा कि एके राय केवल एक नेता नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे. उन्होंने अपना पूरा जीवन मजदूरों, किसानों, आदिवासियों और समाज के वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित कर दिया. उन्होंने कहा कि आज जरूरत इस बात की है कि नई पीढ़ी उनके संघर्ष, सादगी और ईमानदारी से प्रेरणा लेकर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझे. टुंडी विधायक मथुरा महतो ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि अर्पित करने तक सीमित नहीं है, बल्कि एके राय के सिद्धांतों और मूल्यों को आगे बढ़ाने का संकल्प भी है. उन्होंने कहा कि राजनीति का उद्देश्य सत्ता प्राप्त करना नहीं, बल्कि समाज की सेवा करना होना चाहिए और एके राय इसका सबसे बड़ा उदाहरण थे.

सादगी और सिद्धांतों की मिसाल थे एके राय

वक्ताओं ने कहा कि एके राय भारतीय राजनीति में अपनी सादगी, ईमानदारी और सिद्धांतवादी जीवन के कारण अलग पहचान रखते थे. उन्होंने कभी राजनीति को व्यक्तिगत लाभ का माध्यम नहीं बनाया. सांसद और विधायक रहने के बावजूद उन्होंने सरकारी सुविधाओं का उपयोग नहीं किया और हमेशा आम नागरिक की तरह जीवन व्यतीत किया. सभा में मौजूद नेताओं ने कहा कि आज जब राजनीति पर अक्सर स्वार्थ और अवसरवाद के आरोप लगते हैं, ऐसे समय में एके राय का जीवन जनप्रतिनिधियों के लिए आदर्श प्रस्तुत करता है. उन्होंने जीवनभर स्वदेशी की भावना को बढ़ावा दिया और समाज के अंतिम व्यक्ति तक न्याय पहुंचाने के लिए संघर्ष करते रहे.

मजदूरों और किसानों की आवाज बने रहे

एके राय को विशेष रूप से कोयलांचल क्षेत्र के मजदूरों और किसानों के संघर्षों की मजबूत आवाज माना जाता है. उन्होंने विस्थापन, श्रमिक अधिकार, सामाजिक न्याय और आदिवासी हितों से जुड़े मुद्दों को लगातार उठाया. यही वजह रही कि वे धनबाद सहित पूरे झारखंड में जननेता के रूप में सम्मानित हुए. सभा में वक्ताओं ने कहा कि आज भी मजदूर और किसान आंदोलन में उनके विचार प्रासंगिक हैं. सामाजिक न्याय और समानता पर आधारित समाज के निर्माण की उनकी सोच आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बनी रहेगी.

जननेता की विरासत आज भी जीवंत

गौरतलब है कि 21 जुलाई 2019 को धनबाद के केंद्रीय अस्पताल में एके राय का निधन हुआ था. वे तीन बार धनबाद से सांसद और तीन बार विधायक रहे. अपने लंबे राजनीतिक जीवन में उन्होंने न सांसद पेंशन ली, न सरकारी बंगला स्वीकार किया और न ही सरकारी वाहन या सुरक्षा का लाभ लिया. उन्होंने सादगीपूर्ण जीवन जीते हुए हमेशा जनता के बीच रहकर उनकी समस्याओं के समाधान के लिए संघर्ष किया.

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जनसेवा की विरासत हैं एके रॉय

श्रद्धांजलि सभा के अंत में उपस्थित लोगों ने एक स्वर में कहा कि एके राय केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि जनसंघर्ष, ईमानदारी और जनसेवा की ऐसी विरासत हैं, जो आने वाली पीढ़ियों को लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की राह पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी. उनकी विचारधारा और संघर्ष आज भी झारखंड की राजनीतिक और सामाजिक चेतना में जीवंत हैं.

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Published by: Kumarvishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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