शहर में बिजली आपूर्ति को निर्बाध और सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से वर्ष 2017-18 में लगभग ढाई करोड़ रुपये की लागत से 100 अलग-अलग स्थानों पर जेबीवीएनएल की ओर से रिंग मेन यूनिट (आरएमयू) और सेक्शनलाइजर मशीनें लगायी गयीं थीं. इसका उद्देश्य था कि किसी एक हिस्से में फॉल्ट आने पर पूरे इलाके की बिजली बंद न करनी पड़े, बल्कि केवल प्रभावित हिस्से को अलग कर सप्लाई जारी रखी जा सके. लेकिन योजना धरातल पर सफल नहीं हो सकी. मेंटेनेंस व रखरखाव की कमी के कारण ये मशीनें इंस्टॉल होने के दो साल के अंदर ही खराब हो गयीं. आज स्थिति यह है कि शहर के कई इलाकों में ये मशीनें सिर्फ शोपीस बनकर रह गये हैं. इतना ही नहीं कई जगहों पर इनके अंदर लगे कीमती पूर्जे भी चोरी गये हैं.
जानिए, क्या है आरएमयू मशीन
आरएमयू यानी रिंग मेन यूनिट एक अत्याधुनिक बिजली वितरण उपकरण है, जो शहरी इलाकों में निरंतर बिजली आपूर्ति शुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाता है. यह क्लोज्ड सर्किट सिस्टम पर काम करता है, जिसमें बिजली का प्रवाह रिंग के रूप में होता है. यदि किसी हिस्से में फॉल्ट आता है, तो यह तुरंत उस हिस्से को अलग कर बाकी क्षेत्र में बिजली सप्लाई जारी रखता है. इससे उपभोक्ताओं को लंबी बिजली कटौती से राहत मिलती है. आरएमयू में स्विचिंग सिस्टम भी होता है, जिससे बिना मैन्युअल हस्तक्षेप के भी फॉल्ट को नियंत्रित किया जा सकता है. साथ ही इसका इंसुलेटेड सिस्टम सुरक्षा के लिहाज से बेहतर होता है. लेकिन शहर में इन मशीनों के खराब होने के कारण अब यह सुविधा ठप हो चुकी है.
क्या है सेक्शनलाइजर मशीन
सेक्शनलाइजर मशीन भी बिजली वितरण प्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह लाइन को अलग-अलग सेक्शन में विभाजित करने का काम करती है, ताकि फॉल्ट आने पर केवल प्रभावित हिस्से को ही अलग किया जा सके. यह ऑटोमैटिक या मैन्युअल दोनों तरीके से काम कर सकती है. खराबी की स्थिति में यह संबंधित सेक्शन की पहचान कर उसे नेटवर्क से अलग कर देती है, जिससे बाकी क्षेत्र में बिजली आपूर्ति सामान्य बनी रहती है. इससे बिजली विभाग को फॉल्ट ढूंढने और उसे ठीक करने में भी आसानी होती है.लेकिन शहर में लगे सेक्शनलाइजर भी रखरखाव के अभाव में निष्क्रिय हो चुके हैं, जिससे बिजली व्यवस्था पर नकारात्मक असर पड़ा है.
विभागीय लापरवाही से फेल हुई योजना
दरअसल, यह पूरी योजना विभागीय लापरवाही की भेंट चढ़ गई. झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड के मुख्यालय से शहर में विद्युतीकरण का कार्य शुरू किया गया था और आरएमयू व सेक्शनलाइजर की स्थापना की गयी थी. रांची की एक एजेंसी को इन उपकरणों की स्थापना व मेंटेनेंस की जिम्मेदारी सौंपी गयी थी. एजेंसी ने मशीनें इंस्टॉल करने के बाद पूरा भुगतान ले लिया, लेकिन मेंटेनेंस की जिम्मेदारी निभाने में लापरवाही बरती. स्थानीय अधिकारियों ने कई बार पत्राचार किया, लेकिन एजेंसी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला. इस बीच कई अधिकारी बदले, लेकिन किसी ने इस दिशा में ठोस पहल नहीं की.
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