धर्म धारण करने की चीज है : विनिश्चिय सागर मुनिराज

आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी मुनिराज ससंघ धैया जैन मंदिर पहुंचे

धनबाद.

नित्य पूजन, स्वाध्याय, मंदिर दर्शन में धर्म नहीं है. जिनालय, मूर्ति, शास्त्र में भी धर्म में नहीं है. धर्म धारण करने की चीज है. धर्म धर्मात्मा के अंदर मिलेगा, जिसमें उसके भावों में निर्मलता हो, जिनके विचार उत्तम हों, समस्त प्राणी मात्र के लिए दयावान हो, परोपकारी हो. उक्त बातें आचार्य 108 श्री विराग सागर जी के परम प्रभावक शिष्य आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी मुनिराज ससंघ रविवार को धैया जैन मंदिर में प्रवचन करते हुए कही. इससे पूर्व आचार्य श्री 108 विनिश्चय सागर जी मुनिराज ससंघ का रविवार प्रातः धैया जैन मंदिर में आगमन हुआ. उनके साथ छह अन्य मुनिराज और एक छुलक जी भी पधारे है. यहां प्रवचन देते हुए उन्होंने कहा कि जैन मत के अनुसार हमारे तीर्थंकर वितरागी होते हैं. ना वह किसी से कुछ लेते हैं और ना किसी को कुछ देते हैं, पर उनके बताए धर्म के रास्ते पर चलकर मनुष्य अपने लक्ष्य परम सुख तक पहुंच सकता है. मौके पर संजय गोधा, मनीष शाह, सुशील बाकलीवाल, मनीष झांझरी, अमित जैन, राखी जैन, रेणु जैन, शिल्पा जैन, बुलबुल जैन, भारती जैन, सुरेंद्र जैन, नवीन गोधा आदि उपस्थित थे.

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