राजपूत विचार मंच के केंद्रीय अध्यक्ष डीएन सिंह ने रविवार को गोसाईडीह स्थित कार्यालय में बैठक की. इसमें यूजीसी के नये कानून और उच्च शिक्षा संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने संबंधी प्रस्तावित विनियम पर चर्चा की गयी. बैठक में मंच की ओर से इस विनियम का विरोध करने का निर्णय लिया गया. डीएन सिंह ने कहा कि विरोध को प्रभावी बनाने के लिए सवर्ण समाज को एक मंच पर आना होगा.
सवर्ण समाज को एकजुट होने की अपील
डीएन सिंह ने कहा कि यूजीसी के नये विनियम के खिलाफ आंदोलन की जरूरत है. उन्होंने कहा कि वह आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए तैयार हैं. यदि कोई अन्य व्यक्ति या संगठन आंदोलन का नेतृत्व करता है, तो वह भी उसका पूरा सहयोग करेंगे. उन्होंने समाज के लोगों से एकजुट होकर अपनी बात रखने की अपील की.
अनुच्छेद 14 का हवाला देकर जताया विरोध
डीएन सिंह ने आरोप लगाया कि नये नियम में भेदभाव की परिभाषा में केवल सवर्णों को संभावित दोषी मानने का प्रावधान किया गया है. उन्होंने इसे संविधान के अनुच्छेद 14 में प्रदत्त समानता के अधिकार के खिलाफ बताया. मंच की बैठक में इस प्रावधान को लेकर आगे आंदोलन की रणनीति पर भी विचार-विमर्श किया गया.
बैठक में आंदोलन को लेकर बनी सहमति
बैठक में मौजूद सदस्यों ने यूजीसी के विनियम के विरोध में एकजुट होकर आवाज उठाने पर सहमति जतायी. वक्ताओं ने कहा कि समाज के लोगों को अपने अधिकारों और मांगों को लेकर संगठित होकर लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराना चाहिए.
मौके पर राजपूत विचार मंच के नेता उमेश सिंह, आरपी सिंह, दिलीप सिंह, विवेकानंद सिंह, ददन सिंह, सीपी सिंह, पप्पू सिंह, अक्षयवर सिंह समेत कई लोग मौजूद थे.
