धनबाद. जनशिकायतों के त्वरित और प्रभावी निबटारे के मामले में धनबाद पुलिस ने अगस्त में बेहतर प्रदर्शन किया है. पुलिस के अनुसार, पब्लिक ग्रीवांस (पीजी) पोर्टल पर अगस्त की शुरुआत में लंबित शिकायतों और माह के दौरान प्राप्त नयी शिकायतों को मिलाकर कुल 57 शिकायतें निबटारे के लिए उपलब्ध थीं. इनमें से 51 शिकायतों का अगस्त में ही निष्पादन कर दिया गया. माह के अंत में छह शिकायतें लंबित रह गयीं.
42 नयी शिकायतें मिलीं, 51 का हुआ निबटारा
अगस्त की शुरुआत में पीजी पोर्टल पर 15 शिकायतें लंबित थीं. इसके बाद पूरे माह में 42 नयी शिकायतें प्राप्त हुईं. इस तरह कुल 57 शिकायतें पुलिस के समक्ष निबटारे के लिए उपलब्ध थीं.
पुलिस के अनुसार, इनमें 51 शिकायतों का अगस्त में ही निबटारा कर दिया गया. इस तरह महीने के अंत में लंबित शिकायतों की संख्या घटकर छह रह गयी. लंबित शिकायतों में पूर्व से चली आ रही शिकायतों के साथ अगस्त में प्राप्त मामलों का भी हिस्सा शामिल है.
पुलिस ने बताया 121 फीसदी निष्पादन
पुलिस के अनुसार, अगस्त में शिकायतों के निष्पादन का आंकड़ा 121 फीसदी रहा. पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह प्रतिशत पूर्व से लंबित शिकायतों के निपटारे को भी शामिल करने के आधार पर बताया गया है. इसलिए इसे अगस्त में प्राप्त 42 नयी शिकायतों के मुकाबले सीधे निपटारे की दर नहीं माना जा सकता.
पुलिस का जोर शिकायतों को समयबद्ध तरीके से निबटाने और लंबित मामलों की संख्या कम करने पर है.
एसएसपी के निर्देश पर हो रही मॉनिटरिंग
एसएसपी प्रभात कुमार के निर्देश पर पीजी पोर्टल के माध्यम से प्राप्त शिकायतों की नियमित समीक्षा की जा रही है. संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को शिकायतों का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है.
अधिकारियों को शिकायतों के निबटारे में अनावश्यक विलंब से बचने और शिकायतकर्ताओं की समस्याओं का प्रभावी समाधान करने को कहा गया है. इसके लिए लंबित मामलों की स्थिति की लगातार समीक्षा की जा रही है.
छह शिकायतें अभी लंबित
अगस्त के अंत में छह शिकायतें लंबित रह गयीं. पुलिस अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों के निबटारे की प्रक्रिया जारी है. नियमित मॉनिटरिंग के माध्यम से लंबित शिकायतों की संख्या कम करने और शिकायतों के समयबद्ध निष्पादन पर आगे भी जोर दिया जा रहा है.
पीजी पोर्टल के माध्यम से आने वाली शिकायतों की समीक्षा व्यवस्था का उद्देश्य फरियादियों की समस्याओं पर संबंधित पदाधिकारियों की जवाबदेही तय करना और मामलों के निबटारे में अनावश्यक देरी को रोकना है.
