मुख्य संवाददाता, धनबाद,
धनबाद नगर निगम अक्सर किसी ना किसी मामले को लेकर चर्चा में रहता है. कभी काम में लेटलतीफी, तो कभी टेंडर के खेल को लेकर. अब यह शहर में फॉगिंग के लिए खरीदी गयी डेढ़ करोड़ की पांच मशीनों को लेकर चर्चा में है. जानकार बताते हैं कि शहर में मच्छरों के बढ़ते प्रकोप से निजात के लिए निगम ने लगभग 10 माह पहले अत्याधुनिक मशीनें खरीदने की तैयारी की. कोटेशन मंगाया गया. कमेटी ने एक कंपनी का चुनाव किया, जहां से मशीनें खरीदनी थीं. सभी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लगभग नौ माह पहले डेढ़ करोड़ की पांच कोल्ड फॉगिंग मशीनें खरीदी गयीं. ये मशीनें बमुश्किल एक माह भी नहीं चलीं. दरअसल, ये मशीनें सीएनजी से चलने वाली थीं. सबको पता है ही कि धनबाद शहर में केवल दो सीएनजी पंप हैं. इनकी भी शर्त है कि प्रतिदिन पैसे लेंगे, फिर वाहनों में सीएनजी भरेंगे. निगम यह शर्त मानने को तैयार नहीं है. नतीजा, आठ माह से सभी पांच मशीनें बड़टांड़ बस स्टैंड में बेकार खड़ी हैं. लगातार खड़ी रहने से इनके टायर और मशीनों में भी गड़बड़ी की शिकायत आनी शुरू हो गयी है. हद तो यह है कि जनता के टैक्स के पैसे की इस तरह की बर्बादी पर ना तो निगम कुछ बोल रहा है और ना ही सीएनजी भरने के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था हो रही है, ताकि वाहनों का उपयोग हो सके.सुनें निगम अधिकारियों का दावा :
निगम के अधिकारियों का कहना है कि शहर में दो ही सीएनजी पंप हैं. उनसे बातचीत चल रही है. सीएनजी पंप से करार होने के बाद कोल्ड फॉगिंग मशीनें नियमित चलायी जायेंगी. आठ महीने हो चले हैं, बातचीत अंजाम तक नहीं पहुंच सकी है. इधर, बड़ी मशीनें जंग खा रही हैं. निगम हैंड स्प्रे से फॉगिंग के नाम पर खानापूर्ति कर रहा है. शहर के 14 वार्डों की 8.5 लाख की आबादी के लिए तीन हैंड स्प्रे फॉगिंग मशीनें हैं. निगम की मानें, तो इनसे रोटेशन पर शहर में फॉगिंग करायी जा रही है. मशीन भी इतनी छोटी है कि मुश्किल से 20 मिनट में केमिकल खत्म हो जाता है. ऐसे में किसी भी वार्ड में पूरी तरह फॉगिंग नहीं हो पाती है.अफसोसनाक… मेंटेनेंस के करार का नहीं उठा सके फायदा :
अगस्त 2023 में खरीदी गयीं इन पांच कोल्ड फॉगिंग मशीनों के एक साल तक के मेंटेनेंस का जिम्मा उसी कंपनी को था, जिससे खरीदारी हुई थी. लगभग एक माह चलने के बाद लगातार खड़ी इन मशीनों के मेंटेनेंस की समयसीमा जल्द बीतने वाली है. इसके बाद कोई तकनीकी खराबी आने पर इनकी मरम्मत के लिए निगम को अलग से पैसे खर्च करने होंगे.कोट
शहर में नगर निगम की धुआं गाड़ी नहीं दिखती है. निगम को मूलभूत सुविधाओं पर पहल करनी चाहिए. हमलोग नियमित टैक्स देते हैं, लेकिन सुविधा के नाम पर कुछ नहीं है. अगर निगम फॉगिंग गाड़ी चलाने में अक्षम है, तो किसी आउटसोर्स कंपनी को दे दे.प्रभात सुरोलिया,
पूर्व अध्यक्ष, बैंक मोड़ चेंबरडिस्क्लेमर: यह प्रभात खबर समाचार पत्र की ऑटोमेटेड न्यूज फीड है. इसे प्रभात खबर डॉट कॉम की टीम ने संपादित नहीं किया है
