धनबाद. चर्चित रंजय सिंह हत्याकांड में करीब नौ साल से चली न्यायिक कार्यवाही के बाद शनिवार को धनबाद की अदालत ने फैसला सुनाया. जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्गेश चंद्र अवस्थी की अदालत ने अभियुक्त नंद कुमार सिंह उर्फ मामा और हर्ष सिंह को रंजय सिंह की हत्या तथा राजा यादव पर जानलेवा हमले से संबंधित आरोपों में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया.
फैसला सुनाये जाने के समय अभियुक्त हर्ष सिंह न्यायालय में उपस्थित थे, जबकि नंद कुमार सिंह उर्फ मामा को रांची स्थित बिरसा मुंडा केंद्रीय कारागार, होटवार से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से न्यायालय के समक्ष पेश किया गया. बचाव पक्ष की ओर से वरीय अधिवक्ता समर श्रीवास्तव, आयुष श्रीवास्तव और सिद्धार्थ शर्मा ने पक्ष रखा.
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338 तारीखों में हुई सुनवाई
मामले की सुनवाई 338 तारीखों में पूरी हुई. न्यायालय ने 260 पन्नों में अपना निर्णय दर्ज किया है. अभियोजन की ओर से मामले में 24 गवाहों का साक्ष्य कराया गया. न्यायालय ने अभियोजन एवं बचाव पक्ष की दलीलों तथा अभिलेख पर उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करने के बाद दोनों अभियुक्तों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया.
29 जनवरी 2017 को गोली मारकर हुई थी हत्या
रंजय सिंह उर्फ राजीव रंजन सिंह की 29 जनवरी 2017 की शाम करीब 5.30 बजे सरायढेला थाना क्षेत्र के चाणक्य नगर मोड़, बिग बाजार के सामने गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. घटना रामेश्वर तिवारी के घर के समीप हुई थी. उस समय रंजय सिंह स्कूटी से सिंह मेंशन की ओर जा रहे थे. उनके साथ राजा यादव भी स्कूटी पर सवार थे.
प्राथमिकी के अनुसार, बाइक सवार दो हमलावरों ने रंजय सिंह पर फायरिंग की थी. गोली लगने के बाद उन्हें सेंट्रल अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया. घटना में राजा यादव बच गये थे.
राजा यादव के बयान पर 30 जनवरी 2017 को अज्ञात हमलावरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. अनुसंधान के दौरान पुलिस ने राजा यादव से हमलावरों का स्केच तैयार कराया था. पुलिस अनुसंधान में सामने आये तथ्यों के आधार पर बाद में आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गयी.
2018 और 2019 में दाखिल हुआ आरोप पत्र
सरायढेला थाना के तत्कालीन थाना प्रभारी सह अनुसंधानकर्ता निरंजन तिवारी ने पांच नवंबर 2018 को नंद कुमार सिंह उर्फ मामा के खिलाफ आरोप पत्र समर्पित किया था. इसमें उसे कथित शूटर बताया गया था. वहीं हर्ष सिंह के खिलाफ 23 फरवरी 2019 को आरोप पत्र दाखिल किया गया.
चंदन शर्मा और हरेंद्र सिंह के संबंध में अनुसंधान जारी रखा गया था. बाद में 11 दिसंबर 2025 को पुलिस ने चंदन शर्मा के खिलाफ भी आरोप पत्र दाखिल किया. वह फरार बताया गया है और उसके संबंध में न्यायिक कार्यवाही उसकी अनुपस्थिति में आगे बढ़ रही है.
2019 में आरोप गठन के बाद शुरू हुआ था विचारण
न्यायालय ने हर्ष सिंह के खिलाफ 11 नवंबर 2019 और नंद कुमार सिंह उर्फ मामा के खिलाफ 16 नवंबर 2019 को आरोप का गठन किया. इसके बाद दोनों के विरुद्ध विचारण शुरू हुआ.
विचारण के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 24 गवाहों का साक्ष्य प्रस्तुत कराया गया. इनमें राजा यादव, संजय सिंह, अनुसंधानकर्ता निरंजन तिवारी, चिकित्सक डॉ. शैलेंद्र कुमार, डॉ. मनोज कुमार दुबे, डॉ. मकर ध्वज प्रसाद, डॉ. रूबेन हेंब्रम, न्यायिक दंडाधिकारी अर्पित श्रीवास्तव समेत अन्य गवाह शामिल थे.
अभियोजन साक्ष्य और बचाव पक्ष की ओर से रखे गये पक्ष पर सुनवाई पूरी होने के बाद न्यायालय ने शनिवार को अपना निर्णय सुनाया. न्यायालय ने नंद कुमार सिंह उर्फ मामा और हर्ष सिंह को संबंधित आरोपों में संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त कर दिया.
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