शहर में फॉगिंग और साफ-सफाई नहीं होने से इन दिनों मच्छरों का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है. नगर निगम की फॉगिंग व्यवस्था लगभग ठप पड़ी है. हालत यह है कि निगम के पास मौजूद अधिकांश मशीनें कबाड़ बनकर खड़ी हैं. इसके कारण शाम ढलते ही कॉलोनियों, बाजारों और जलजमाव वाले इलाकों में मच्छरों का आतंक बढ़ जाता है. कोरोना काल में नगर निगम के पास ट्रक पर लगीं दो बड़ी फॉगिंग मशीनें थीं, इनसे शहर के कई इलाकों में नियमित धुआं किया जाता था. लेकिन फिलहाल दोनों मशीनें खराब पड़ी हैं. इसके साथ ही 2015 में 15 मिनी फोगिंग मशीन खरीदी गयी थीं. रखरखाव के अभाव में यह मशीनें भी कबाड़ हो गयीं. दो साल पहले खरीदी गयीं पांच कोल्ड फॉगिंग मशीन भी उपयोग के अभाव में जंग खा रही हैं.
ईंधन की कमी के कारण यह व्यवस्था भी प्रभावी नहीं
फिलहाल निगम कर्मी छह हैंड स्प्रे मशीनों के सहारे मोहल्लों में फॉगिंग कर रहे हैं. लेकिन ईंधन की कमी के कारण यह व्यवस्था भी प्रभावी नहीं हो पा रही है. एक मशीन के लिए केवल चार लीटर डीजल और 200 एमएल पेट्रोल दिया जाता है, जिससे मुश्किल से पांच से दस मिनट ही मुहल्ले में फॉगिंग हो पाती है. फिलहाल हैंड स्प्रे की व्यवस्था भी लगभग ठप है.
