केंद्र सरकार ने खान और खनिज क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण खनिज और खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 को शनिवार से लागू कर दिया है. खान मंत्रालय ने 22 अगस्त को राजपत्र में अधिसूचना जारी कर अधिनियम के प्रावधानों के प्रभावी होने की तारीख तय कर दी. यह खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 का संशोधित रूप है.
राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित
खान मंत्रालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, केंद्र सरकार ने अधिनियम की धारा-1 की उपधारा (2) के तहत प्राप्त शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए 22 अगस्त 2026, यानी राजपत्र में अधिसूचना प्रकाशित होने की तारीख को ही कानून के लागू होने की तारीख निर्धारित किया है.
यह अधिनियम 2026 का अधिनियम संख्या 20 है. अधिसूचना में स्पष्ट किया गया है कि संशोधित कानून के प्रावधान अब प्रभावी माने जायेंगे. खान मंत्रालय की अपर सचिव डॉ वीणा कुमारी डर्मल के हस्ताक्षर से जारी अधिसूचना में इसका उल्लेख किया गया है.
खनन क्षेत्र में बदलाव का रास्ता साफ
संशोधन लागू होने के बाद खनिज क्षेत्र से संबंधित नियमों और प्रक्रियाओं में हुए बदलाव अब प्रभावी होंगे. इसका असर खनिजों के विकास, नियमन, खनन गतिविधियों और संबंधित प्रशासनिक प्रक्रियाओं पर पड़ सकता है. हालांकि, अधिनियम के अलग-अलग प्रावधानों का वास्तविक प्रभाव उनके विस्तृत प्रावधानों और आगे जारी होने वाले नियमों के आधार पर स्पष्ट होगा.
यह है अधिसूचना
खनिज एवं खनिज (विकास और विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 का उद्देश्य खनन क्षेत्र में कराधान और नियमन की व्यवस्था को अधिक स्पष्ट, समान और स्थिर बनाना है. इसके तहत खनिज अधिकारों और खनिज-युक्त भूमि पर राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले कर, उपकर या अन्य लेवी को लेकर एकरूपता लाने का प्रयास किया गया है.
संशोधन से खनन कंपनियों पर अलग-अलग राज्यों में बदलती कर व्यवस्था से उत्पन्न अनिश्चितता कम करने और निवेश को प्रोत्साहित करने का लक्ष्य है. साथ ही, यह केंद्र और राज्यों के बीच खनिज राजस्व एवं कराधिकार के संतुलन को लेकर भी महत्वपूर्ण है.
