सांस की बीमारी से बचाव के लिए घरों में धूल-मिट्टी जमा न होने दें, बोले डॉ आकाश दीप

Medical Counselling: अस्थमा और एलर्जी को नियंत्रित रखने के लिए सबसे जरूरी है ट्रिगर फैक्टर से बचाव. घरों में धूल-मिट्टी जमा न होने दें, सप्ताह में कम-से-कम दो बार साफ-सफाई करें. घर में धूम्रपान पूरी तरह बंद करें, क्योंकि तंबाकू का धुआं अस्थमा मरीजों के लिए बेहद हानिकारक है. इसके अलावा अगर कोई परिवार पालतू जानवर रखता है, तो उसकी नियमित सफाई सुनिश्चित करें.

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Medical Counselling: बदलते मौसम, बढ़ते प्रदूषण और जीवनशैली में हो रहे लगातार बदलाव के कारण अस्थमा व एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में समय पर सावधानी अपनाकर इन बीमारियों से काफी हद तक बचाव संभव है. अस्थमा एक दीर्घकालिक श्वसन रोग है, जिसमें मरीज को सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न, खांसी और घरघराहट की शिकायत होती है. एलर्जी धूल, धुआं, प्रदूषण, पालतू जानवरों के बाल, तेज गंध व मौसम में बदलाव के कारण भी हो सकती है.

अस्थमा और एलर्जी से बचने के लिए ट्रिगर फैक्टर से बचाव जरूरी

उन्होंने कहा कि बच्चों और बुजुर्गों में यह समस्या अधिक देखी जा रही है. इसलिए परिवारों को जागरूक रहने की जरूरत है. अस्थमा और एलर्जी को नियंत्रित रखने के लिए सबसे जरूरी है ट्रिगर फैक्टर से बचाव. घरों में धूल-मिट्टी जमा न होने दें, सप्ताह में कम-से-कम दो बार साफ-सफाई करें. घर में धूम्रपान पूरी तरह बंद करें, क्योंकि तंबाकू का धुआं अस्थमा मरीजों के लिए बेहद हानिकारक है. इसके अलावा अगर कोई परिवार पालतू जानवर रखता है, तो उसकी नियमित सफाई सुनिश्चित करें.

  • प्रभात खबर ऑनलाइन मेडिकल काउंसेलिंग में इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ आकाश दीप
  • बदलते मौसम और प्रदूषण से बढ़ रहे अस्थमा और एलर्जी के मरीज
  • लोगों की जीवनशैली में हो रहे बदलाव से भी बढ़ रही है परेशानी

Medical Counselling: सुबह घर से बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें

सुबह बाहर निकलते समय मास्क जरूर पहनें. सुबह-शाम के समय हवा में परागकणों की मात्रा अधिक होती है. इसलिए अस्थमा व एलर्जी के मरीज ऐसे समय में बाहर निकलने से बचें. शुक्रवार को प्रभात खबर के ऑनलाइन मेडिकल काउंसलिंग में इंटरवेंशनल पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ आकाश दीप ने दिये ये सुझाव दिये. इस दौरान ज्यादातर लोगों ने श्वसन संबंधित बीमारियों से जुड़े प्रश्न पूछे. सभी सवालों के डॉ आकाश ने जवाब दिये. प्रश्न और उत्तर यहां पढ़ें.

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गोमो से दुर्गेश चंद्र मंडल ने पूछा : काफी दिनों से सांस लेने में तकलीफ हो रही है?

डॉक्टर : सबसे पहले सांस फूलने के कारणों का पता लगाना जरूरी है. इसके लिए पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट कराना आवश्यक है. जांच रिपोर्ट के बाद ही इलाज शुरू किया जा सकता है.

कुसुम विहार से नंदनी ने पूछा : कुछ दिनों से पति को लगातार छींक आने की समस्या है. सांस भी फूलता है?

डॉक्टर : यह एलर्जी व अस्थमा दोनों की वजह से हो सकता है. बीमारी का पता लगाने के लिए कुछ जांच कराना जरूरी है. इसके लिए पल्मोनोलॉजिस्ट चिकित्सक से संपर्क करें.

जामताड़ा से सोनाली ने पूछा : पति के बांये छाती में दर्द रहता है. खांसी की समस्या भी है?

डॉक्टर : यह समस्या आम तौर पर ज्यादा धूम्रपान करने वालों के साथ होती है. लंबे समय से धूम्रपान करने से श्वासन की नली पतली हो जाती है, जिससे यह समस्या होती है. पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट करा फेफड़ों की स्थिति की जांच के बाद इलाज संभव है.

भूईफोड़ मंदिर के समीप से एबीपी सिन्हा ने पूछा : नाक हमेशा जाम होने के साथ खांसी की समस्या है?

डॉक्टर : यह आम तौर पर ज्यादा पॉल्यूटेड जगह पर रहने की वजह से हो सकता है. जांच के बाद ही बीमारी का पता लगाया जा सकता है.

झरिया से मो आरिफ ने पूछा : काफी दिनों से सांस फूलने की समस्या है, क्या उपाय करें?

डॉक्टर : सबसे पहले सांस फूलने की वजह की तलाश करनी होगी. इसके बाद ही इलाज शुरू किया जा सकता है. इसके लिए एलर्जी टेस्ट कराना जरूरी है. रिपोर्ट के बाद इम्यून थेरेपी से बीमारी पूरी तरह ठीक करना संभव है.

बैंकमोड़ से शहबाज से पूछा : नाक हमेशा जाम रहता है. बार-बार छींक आने की समस्या से परेशान हूं?

डॉक्टर : सबसे पहले कुछ बातों का विशेष ध्यान देने की जरूरत है. इनमें बेडशीट की नियमित सफाई शामिल है. सोने के वक्त माइक्रोफाइबर से बने पिलो का इस्तेमाल करें. यह समस्या एलर्जी की वजह से हो सकती है.

रानीबांध, धनबाद से राहुल ने पूछा : ठंड में सांस लेने में परेशानी होती है. कई वर्षों से यह समस्या है?

डॉक्टर : सबसे पहले फेफड़ों की जांच कराना जरूरी है. इससे बीमारी का पता लगाना आसान होगा. यह अस्थमा की वजह से हो सकता है.

धनबाद से मुकेश ने पूछा : मां की उम्र 55 वर्ष है. वह हफनी की समस्या से ग्रसित हैं?

डॉक्टर : यह अस्थमा से संबंधित लक्षण है. उम्र अधिक होने की वजह से यह बीमारी बढ़ जाती है. पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट कराकर फेफड़ों की क्षमता का परीक्षण करना होगा. इसके बाद ही इलाज शुरू किया जा सकता है.

धनबाद से श्याम कुमार ने पूछा : मेरी उम्र 25 वर्ष है. ठंड के दिनों में खांसी से परेशान रहता हूं, सांस भी फूलती है?

डॉक्टर : यह अस्थमा की वजह से हो सकता है. बीमारी का पता लगाने के लिए फओटी के साथ एइसी, आइइजी जांच कराएं. रिपोर्ट आने के बाद इलाज संभव है.

केंदुआ से सम्राट ने पूछा : सर्दी के दिनों में ड्राइ कफ की समस्या रहती है. सांस भी फूलता है?

डॉक्टर : बीमारी का पता लगाने के लिए एइसी, आइइजी के साथ पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट कराना होगा. इससे बीमारी का पता लगाया जा सकता है. यह आमतौर पर अस्थमा से जुड़ा लक्षण हो सकता है.

अस्थमा और श्वसन संबंधी बीमारी से बचाव के लिए क्या करें?

स्वच्छ हवा में रहें, घर में धूल, धुआं और फंगस न जमा होने दें, कमरों को नियमित रूप से हवादार रखें. नियमित व्यायाम और सांस संबंधी योग करें, पालतू जानवरों के बाल, परफ्यूम जैसे ट्रिगर पहचान कर उनसे दूरी रखें, विटामिन-सी युक्त फल, हरी सब्जियां और संतुलित आहार लें.

अस्थमा-श्वसन संबंधी बीमारी से बचाव के लिए क्या न करें?

धूल, धुआं और प्रदूषण से बचें, ट्रैफिक स्मॉग, सिगरेट का धुआं, चूल्हा, भट्ठी का धुआं फेफड़ों के लिए हानिकारक ह., इत्र, अगरबत्ती और केमिकल स्प्रे से दूरी रखें, ठंडी चीजें अधिक ना लें, पालतू जानवरों को बेडरूम में नहीं आने दें. सिगरेट, तंबाकू का सेवन बिल्कुल नहीं करें. संक्रमण को नजरअंदाज नहीं करें, खांसी, बुखार व सांस फूलने जैसे लक्षण आने पर तुरंत जांच करायें.

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By Mithilesh Jha

मिथिलेश झा PrabhatKhabar.com में पश्चिम बंगाल राज्य प्रमुख (State Head) के रूप में कार्यरत वरिष्ठ पत्रकार हैं. उन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में 32 वर्षों से अधिक का व्यापक अनुभव है. उनकी रिपोर्टिंग राजनीति, सामाजिक मुद्दों, जलवायु परिवर्तन, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि और अन्य समसामयिक विषयों पर केंद्रित रही है, जिससे वे क्षेत्रीय पत्रकारिता में एक विश्वसनीय और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित हुए हैं. अनुभव : पश्चिम बंगाल, झारखंड और बिहार में 3 दशक से अधिक काम करने का अनुभव है. वर्तमान भूमिका : प्रभात खबर डिजिटल (prabhatkhabar.com) में पश्चिम बंगाल के स्टेट हेड की भूमिका में हैं. वे डिजिटल न्यूज कवर करते हैं. तथ्यात्मक और जनहित से जुड़ी पत्रकारिता को प्राथमिकता देते हैं. वर्तमान में बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 पर पूरी तरह से फोकस्ड हैं. भौगोलिक विशेषज्ञता : उनकी रिपोर्टिंग का मुख्य फोकस पश्चिम बंगाल रहा है, साथ ही उन्होंने झारखंड और छत्तीसगढ़ की भी लंबे समय तक ग्राउंड-लेवल रिपोर्टिंग की है, जो उनकी क्षेत्रीय समझ और अनुभव को दर्शाता है. मुख्य विशेषज्ञता (Core Beats) : उनकी पत्रकारिता निम्नलिखित महत्वपूर्ण और संवेदनशील क्षेत्रों में गहरी विशेषज्ञता को दर्शाती है :- राज्य राजनीति और शासन : झारखंड और पश्चिम बंगाल की राज्य की राजनीति, सरकारी नीतियों, प्रशासनिक निर्णयों और राजनीतिक घटनाक्रमों पर निरंतर और विश्लेषणात्मक कवरेज. सामाजिक मुद्दे : आम जनता से जुड़े सामाजिक मुद्दों, जनकल्याण और जमीनी समस्याओं पर केंद्रित रिपोर्टिंग. जलवायु परिवर्तन और नवीकरणीय ऊर्जा : पर्यावरणीय चुनौतियों, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और रिन्यूएबल एनर्जी पहलों पर डेटा आधारित और फील्ड रिपोर्टिंग. डाटा स्टोरीज और ग्राउंड रिपोर्टिंग : डेटा आधारित खबरें और जमीनी रिपोर्टिंग उनकी पत्रकारिता की पहचान रही है. विश्वसनीयता का आधार (Credibility Signal) : तीन दशकों से अधिक की निरंतर रिपोर्टिंग, विशेष और दीर्घकालिक कवरेज का अनुभव तथा तथ्यपरक पत्रकारिता के प्रति प्रतिबद्धता ने मिथिलेश झा को पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए एक भरोसेमंद और प्रामाणिक पत्रकार के रूप में स्थापित किया है.

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