धनबाद के मेयर संजीव सिंह की पहल लाई रंग, दिवंगत बीसीसीएल कर्मचारी के बेटे को मिली नौकरी

Dhanbad News: धनबाद के मेयर संजीव सिंह की पहल से बीसीसीएल पीबी एरिया के दिवंगत कर्मचारी धीरेंद्र नाथ सरदार के पुत्र प्रेम सरदार को आश्रित के रूप में स्थायी नौकरी मिल गई. मेयर के हस्तक्षेप के बाद प्रबंधन ने नियोजन प्रक्रिया पूरी कर परिवार को आर्थिक सहारा प्रदान किया. इससे जुड़ी खबर नीचे पढ़ें.

झरिया से उमेश सिंह की रिपोर्ट

Dhanbad News: बीसीसीएल पीबी एरिया में कार्यरत बोरागढ़ निवासी कर्मचारी स्वर्गीय धीरेंद्र नाथ सरदार के आकस्मिक निधन के बाद उनके परिवार पर आर्थिक संकट गहरा गया था. ऐसे कठिन समय में धनबाद के मेयर संजीव सिंह की पहल रंग लाई और दिवंगत कर्मचारी के छोटे बेटे प्रेम सरदार को आश्रित के रूप में स्थायी नौकरी मिल गई. मेयर के हस्तक्षेप के बाद बीसीसीएल प्रबंधन ने नियोजन प्रक्रिया को तेजी से पूरा करते हुए नियुक्ति सुनिश्चित की. कई बार फाइलों की रफ्तार घोंघे से मुकाबला करती है, लेकिन कभी-कभी एक फोन और कुछ गंभीरता व्यवस्था को भी तेज चलना याद दिला देती है.

कार्य के दौरान बिगड़ी थी कर्मचारी की तबीयत

जानकारी के अनुसार, बीसीसीएल पीबी एरिया में कार्यरत धीरेंद्र नाथ सरदार की ड्यूटी के दौरान अचानक तबीयत बिगड़ गई थी. उन्हें इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया. परिवार के कमाने वाले सदस्य के निधन के बाद परिजनों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया था. मृतक कर्मचारी के आश्रित को नौकरी दिलाने का मामला भी लंबे समय से लंबित बताया जा रहा था, जिससे परिवार की परेशानी और बढ़ गई थी.

श्रद्धांजलि सभा के दौरान मिली जानकारी

मजदूर नेता एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय सूर्यदेव सिंह की 35वीं पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित श्रद्धांजलि सभा में धनबाद के मेयर संजीव सिंह को इस घटना की जानकारी मिली. उन्हें बताया गया कि धीरेंद्र नाथ सरदार के निधन के बाद आश्रित को नौकरी देने के मामले में बीसीसीएल प्रबंधन की ओर से देरी की जा रही है. मामले की जानकारी मिलते ही मेयर संजीव सिंह ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल संबंधित अधिकारियों तथा बीसीसीएल प्रबंधन से संपर्क स्थापित किया.

मेयर के हस्तक्षेप के बाद पूरी हुई प्रक्रिया

मेयर संजीव सिंह ने बीसीसीएल प्रबंधन से बातचीत कर मृतक कर्मचारी के छोटे पुत्र प्रेम सरदार को आश्रित के रूप में स्थायी नियोजन देने की मांग की. उन्होंने मामले को मानवीय दृष्टिकोण से देखते हुए शीघ्र कार्रवाई का आग्रह किया. मेयर की पहल और लगातार प्रयासों के बाद बीसीसीएल प्रबंधन ने सकारात्मक रुख अपनाया और नियोजन से जुड़ी प्रक्रिया को तत्काल पूरा कर प्रेम सरदार को नौकरी प्रदान कर दी. इससे शोकाकुल परिवार को बड़ी राहत मिली है.

पीड़ित परिवार को हरसंभव मदद मिलनी चाहिए: संजीव सिंह

मेयर संजीव सिंह ने कहा कि किसी भी परिवार के लिए अपने कमाने वाले सदस्य को खोना सबसे बड़ा दुख होता है. ऐसे समय में प्रशासन और प्रबंधन का दायित्व है कि पीड़ित परिवार को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाए. उन्होंने कहा कि धीरेंद्र नाथ सरदार के निधन से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है, लेकिन आश्रित को रोजगार मिलने से परिवार को आर्थिक संबल मिलेगा. उन्होंने दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि मजदूर हितों की रक्षा और उनके परिवारों की सुरक्षा उनकी प्राथमिकता है और भविष्य में भी जरूरतमंद परिवारों के साथ खड़े रहेंगे.

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स्थानीय लोगों और श्रमिक संगठनों ने जताया आभार

मेयर की त्वरित पहल की स्थानीय लोगों, श्रमिक संगठनों और मृतक कर्मचारी के परिजनों ने सराहना की है. लोगों का कहना है कि संकट की इस घड़ी में जिस संवेदनशीलता और तत्परता के साथ मेयर संजीव सिंह ने हस्तक्षेप किया, उससे एक परिवार को नई उम्मीद और आर्थिक सहारा मिला है. श्रमिक संगठनों ने भी इसे मानवीय पहल बताते हुए कहा कि ऐसे मामलों में त्वरित निर्णय पीड़ित परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित होते हैं.

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Published by: KumarVishwat Sen

कुमार विश्वत सेन प्रभात खबर डिजिटल में डेप्यूटी चीफ कंटेंट राइटर हैं. इनके पास हिंदी पत्रकारिता का 25 साल से अधिक का अनुभव है. इन्होंने 21वीं सदी की शुरुआत से ही हिंदी पत्रकारिता में कदम रखा. दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता का कोर्स करने के बाद दिल्ली के दैनिक हिंदुस्तान से रिपोर्टिंग की शुरुआत की. इसके बाद वे दिल्ली में लगातार 12 सालों तक रिपोर्टिंग की. इस दौरान उन्होंने दिल्ली से प्रकाशित दैनिक हिंदुस्तान दैनिक जागरण, देशबंधु जैसे प्रतिष्ठित अखबारों के साथ कई साप्ताहिक अखबारों के लिए भी रिपोर्टिंग की. 2013 में वे प्रभात खबर आए. तब से वे प्रिंट मीडिया के साथ फिलहाल पिछले 10 सालों से प्रभात खबर डिजिटल में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. इन्होंने अपने करियर के शुरुआती दिनों में ही राजस्थान में होने वाली हिंदी पत्रकारिता के 300 साल के इतिहास पर एक पुस्तक 'नित नए आयाम की खोज: राजस्थानी पत्रकारिता' की रचना की. इनकी कई कहानियां देश के विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई हैं.

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