धनबाद. करीब 14 वर्षों से अधर में पड़ी बीसीसीएल की लगभग 350 करोड़ रुपये की महेशपुर सायलो परियोजना अब धरातल पर उतरने लगी है. शुक्रवार को पहली बार ट्रायल डीजल इंजन सायलो प्लांट पहुंचा. इसके बाद परियोजना को चालू करने की तैयारियों ने गति पकड़ ली है.
बीसीसीएल बरोरा जीएम केके सिंह ने प्लांट में पूजा-अर्चना कर नारियल फोड़ा. इसके बाद अधिकारियों ने इंजन चालक का माला और गुलदस्ता देकर स्वागत किया. सायलो में 58 बक्सों की पहली रैक की लोडिंग की तैयारी पूरी कर ली गयी है. प्लांट में रैक लोडिंग के लिए तैयार है. अब प्रबंधन को रेलवे से रैक मिलने का इंतजार है.
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2012 में शुरू हुई थी परियोजना
महेशपुर सायलो परियोजना की शुरुआत वर्ष 2012 में हुई थी. वर्ष 2020 से इसे चालू करने की तैयारी थी, लेकिन कोयले की उपलब्धता, रेल कनेक्टिविटी और तकनीकी व प्रशासनिक अड़चनों के कारण परियोजना में लगातार विलंब होता रहा.
करीब दो माह पूर्व धनबाद रेल मंडल के डीआरएम अखिलेश मिश्रा के नई रेल लाइन के निरीक्षण के बाद परियोजना के काम में तेजी आयी. इसके बाद रेल कनेक्टिविटी से जुड़े कार्यों को आगे बढ़ाया गया.
रोज 15 हजार टन कोयले की लोडिंग की क्षमता
महेशपुर सायलो में प्रतिदिन 15 हजार टन क्रश कोयले की क्रशिंग और लोडिंग की क्षमता है. परियोजना के चालू होने से सड़क मार्ग से कोयला ढुलाई पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है. इससे कोयला परिवहन के दौरान होने वाले धूल प्रदूषण में भी कमी आ सकती है.
सोनारडीह से रेल संपर्क के जरिये कोयले की ढुलाई तेज, सुरक्षित और अपेक्षाकृत कम खर्चीली होने की उम्मीद है. इससे क्षेत्र से कोयला परिवहन की व्यवस्था में भी बदलाव आयेगा.
पहली रैक के लिए प्रबंधन तैयार
सायलो पीओ धीरज कुमार ने बताया कि रेल लाइन का ट्रायल रन पूरा हो चुका है. प्लांट में पर्याप्त मात्रा में क्रश कोयला उपलब्ध है. रेलवे से 58 बक्सों की रैक मिलते ही पहली रैक की लोडिंग शुरू की जा सकती है. इसके लिए प्रबंधन की टीम पूरी तरह तैयार है.
मौके पर रेल राइट्स के अधिकारी प्रशांत कुमार, मुख्यालय जीएम यूजी साइडिंग जीके मेहता, बरोरा एजीएम पी. पांडेय, क्षेत्रीय सेल्स अधिकारी चंद्रजीत समेत अन्य अधिकारी और सायलो कर्मी मौजूद थे.
