Dhanbad News: भारत सरकार द्वारा लागू चार नये श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से बीसीसीएल की ओर से शनिवार को कल्याण मंडपम, जगजीवन नगर में सेमिनार का आयोजन किया गया. ‘नये श्रम संहिताओं के तहत औद्योगिक संबंध संहिता’ विषय पर आयोजित सेमिनार में बीसीसीएल अधिकारियों और कर्मचारियों को नये श्रम कानूनों के विभिन्न प्रावधानों एवं अनुपालन की जानकारी दी गयी. कार्यक्रम की अध्यक्षता करते बीसीसीएल सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि वर्तमान औद्योगिक परिवेश में श्रम सुधारों की जानकारी और उसका प्रभावी अनुपालन बेहद जरूरी है. नयी श्रम संहिताएं श्रमिक हितों की रक्षा, औद्योगिक संतुलन, पारदर्शिता और संगठनात्मक दक्षता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है. सभी अधिकारियों और कर्मचारियों को नये श्रम कानूनों की जानकारी लेकर उनके प्रभावी क्रियान्वयन में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए.
इनकी रही भागीदारी
मौके पर निदेशक (मानव संसाधन) मुरली कृष्ण रमैया, निदेशक (तकनीकी-संचालन) संजय कुमार सिंह, महाप्रबंधक (मानव संसाधन) कुमार मनोज, महाप्रबंधक (खनन/एचआरडी) सुधाकर प्रसाद, विभागाध्यक्ष (औद्योगिक संबंध/सीएसआर) सुरेंद्र भूषण, विभागाध्यक्ष (प्रशासन) मनीष मिश्रा सहित मुख्यालय और विभिन्न क्षेत्रों के कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.
प्रश्रोत्तर सत्र
सेमिनार में प्रश्नोत्तर सत्र भी आयोजित किये गये, जिसमें अधिकारियों और कर्मचारियों ने श्रम संहिताओं से जुड़े प्रश्न पूछे. मुख्य वक्ता ने सवालों के उत्तर दिये. संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन विभागाध्यक्ष (विधि) डॉ कुमार शरत सिन्हा ने किया.
29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर चार नये लेबर कोड लागू : अनूप मेहता
मुख्य वक्ता झारखंड उच्च न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप कुमार मेहता ने नये श्रम संहिताओं और विशेष रूप से इंडस्ट्रियल रिलेशन कोड 2020 के विभिन्न प्रावधानों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने 29 पुराने श्रम कानूनों को समाहित कर चार नये लेबर कोड लागू किया है. इसका उद्देश्य सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करना, कार्यस्थल सुरक्षा सुनिश्चित करना, अनुपालन प्रक्रिया को सरल बनाना तथा रोजगार सृजन को बढ़ावा देना है. कहा : औद्योगिक संबंध संहिता 2020 के अंतर्गत ट्रेड यूनियन अधिनियम 1926, औद्योगिक रोजगार अधिनियम 1946 और औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 का विलय किया गया है. साथ ही, फिक्स्ड टर्म रोजगार, ट्रेड यूनियन की मान्यता, कौशल निधि, 300 कर्मचारियों तक सीमा वृद्धि, 14 दिन की अनिवार्य हड़ताल की सूचना और दो-सदस्यीय औद्योगिक न्यायाधिकरण जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल किये गये हैं.
