केंदुआडीह राजपूत बस्ती के रैयतों की वर्षों पुरानी भूमि संबंधी समस्याओं के समाधान के लिए जिला प्रशासन ने महत्वपूर्ण पहल की है. अब क्षेत्र के जमीन विवादों और उससे जुड़े मामलों की समीक्षा जिला स्तर पर गठित डिस्ट्रिक्ट लैंड सेल (जिला भूमि प्रकोष्ठ) करेगा. प्रकोष्ठ की अध्यक्षता एसी, धनबाद करेंगे. इसका उद्देश्य राजस्व, भूमि अधिग्रहण और संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर रैयतों को मामलों का त्वरित और पारदर्शी समाधान उपलब्ध कराना है.
स्वामित्व से मुआवजे तक मामलों की होगी समीक्षा
जिला भूमि प्रकोष्ठ के माध्यम से जमीन के स्वामित्व, राजस्व अभिलेख, सीमांकन, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा और अन्य लंबित मामलों की समीक्षा की जा सकेगी. संबंधित विभागों से रिपोर्ट और अभिलेख मंगाकर मामलों की स्थिति स्पष्ट करने तथा नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जायेगी. इससे रैयतों को अलग-अलग कार्यालयों का चक्कर लगाने के बजाय जिला स्तर पर अपनी शिकायत और दस्तावेज प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा.
धनबाद में जमीन से जुड़े मामले व्यापक
जिले में भूमि हस्तांतरण, निजी जमीन का अधिग्रहण, सरकारी योजनाओं के लिए भूमि उपलब्ध कराना और रैयतों के हितों की सुरक्षा जैसे मामले काफी हैं. धनबाद-केंदुआडीह-जगताकुंडा अंचल के अंतर्गत 85 राजस्व गांव हैं. प्रशासन ने राजस्व व निबंधन अभिलेखों को डिजिटल करने के साथ ऑनलाइन दाखिल-खारिज और लगान भुगतान जैसी सुविधाएं भी शुरू की हैं.
बीसीसीएल की जमीन और मुआवजा भी अहम मुद्दा
कोयलांचल में भूमि अधिग्रहण और मुआवजा लंबे समय से संवेदनशील विषय रहे हैं. बीसीसीएल के वर्ष 2024-25 के दस्तावेज के अनुसार कंपनी के पास भूमि अधिग्रहण कानून के तहत अधिग्रहित 502.01 हेक्टेयर भूमि है. भूमि से जुड़े आवेदनों, मुआवजा और जमीन के बदले रोजगार संबंधी मामलों के लिए भी कंपनी स्तर पर व्यवस्था है.
पुराने मामलों के निपटारे की बढ़ी उम्मीद
बीसीसीएल की परियोजनाओं से जुड़े भूमि अर्जन के मामलों में समय-समय पर जिला प्रशासन अधिसूचनाएं और आदेश जारी करता रहा है. ऐसे में जिला भूमि प्रकोष्ठ के गठन से पुराने मामलों की दस्तावेजी जांच, विभागीय समन्वय और लंबित मामलों की समीक्षा एक जगह होने की उम्मीद है. इससे केंदुआडीह के रैयतों को भूमि विवादों के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस पहल मिल सकती है.
