धनबाद. वाणिज्यिक कोयला खदानों की पारदर्शी नीलामी से झारखंड के कोयला क्षेत्र में निवेश और विकास की नई संभावनाएं बन रही हैं. केंद्र सरकार ने 18 जून 2020 को वाणिज्यिक कोयला खदानों की नीलामी व्यवस्था शुरू की थी. इसके तहत देशभर में अब तक 147 कोयला खदानों की नीलामी हो चुकी है. इनमें झारखंड समेत प्रमुख कोयला उत्पादक राज्यों के कई ब्लॉक शामिल हैं.
झारखंड के लिए कोयला खनन केवल ऊर्जा जरूरतों से जुड़ा क्षेत्र नहीं है, बल्कि राज्य के राजस्व, स्थानीय विकास और रोजगार का भी महत्वपूर्ण आधार है. नीलाम किये गये कोयला ब्लॉकों से राज्य सरकार को रॉयल्टी के अलावा राजस्व हिस्सेदारी, जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ), एनएमइटी और जीएसटी के माध्यम से आय होती है.
डीएमएफ से खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास
कोयला खनन से मिलने वाले जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) के संसाधनों का उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों में विकास कार्यों के लिए किया जाता है. इसके तहत सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को गति मिल सकती है.
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झारखंड में धनबाद लंबे समय से देश के प्रमुख कोयला क्षेत्रों में शामिल रहा है. ऐसे में वाणिज्यिक कोयला खनन के विस्तार से जिले में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है. खनन गतिविधियों में तेजी आने से परिवहन, मशीनरी, सेवा क्षेत्र और छोटे कारोबार से जुड़े लोगों को भी लाभ मिलने की संभावना है.
147 ब्लॉकों से 47,500 करोड़ रुपये वार्षिक राजस्व का अनुमान
देशभर में नीलाम किये गये 147 कोयला ब्लॉकों से करीब 47,500 करोड़ रुपये के वार्षिक राजस्व का अनुमान है. इसके अलावा लगभग 55,000 करोड़ रुपये के पूंजी निवेश और 4.9 लाख रोजगार सृजन की संभावना जतायी गयी है.
वित्त वर्ष 2025-26 में कैप्टिव और वाणिज्यिक कोयला ब्लॉकों से करीब 210 मिलियन टन कोयला उत्पादन हुआ. यह पहली बार है जब इन ब्लॉकों से कोयला उत्पादन 200 मिलियन टन के आंकड़े को पार कर गया.
निवेश बढ़ने से झारखंड को मिलेगा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, पारदर्शी नीलामी व्यवस्था से निजी निवेश को बढ़ावा मिलने की संभावना है. नये खदानों के संचालन से कोयला उत्पादन बढ़ने के साथ खनन क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियां भी तेज हो सकती हैं.
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झारखंड जैसे कोयला उत्पादक राज्य के लिए इसका असर राजस्व, रोजगार और स्थानीय विकास के रूप में लंबे समय में दिखाई दे सकता है. हालांकि, खनन विस्तार के साथ स्थानीय क्षेत्र के विकास और खनन प्रभावित लोगों के हितों को भी प्राथमिकता देना महत्वपूर्ण होगा.
