धनबाद. आइआइटी आइएसएम धनबाद के पूर्व छात्र और 2020 बैच के पासआउट सौरव सिंह ने स्वदेशी हाई-एंड्योरेंस ड्रोन विकसित कर उपलब्धि हासिल की है. उनके स्टार्टअप जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित विजय जेड-1 ड्रोन ने अरुणाचल प्रदेश में भारतीय सेना के हाई एल्टीट्यूड परीक्षण के दौरान 14 हजार फीट की ऊंचाई पर एक घंटे 18 मिनट 26 सेकेंड तक सफल उड़ान भरी. इस दौरान ड्रोन ने भारतीय सेना के 45 मिनट तक लगातार उड़ान भरने के निर्धारित लक्ष्य से काफी अधिक समय तक उड़ान भरी.
बारिश और कोहरे के बीच हुआ परीक्षण
भारतीय सेना की इस्टर्न कमांड की ओर से तीन और चार अगस्त को अरुणाचल प्रदेश के हाई एल्टीट्यूड बेस कैंप और सेला टॉप के ऊपर विजय जेड-1 का परीक्षण किया गया. परीक्षण के दौरान बारिश और कोहरे जैसी परिस्थितियां भी थीं. इसके बावजूद ड्रोन ने निर्धारित उड़ान समय से अधिक समय तक उड़ान पूरी की.
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ड्रोन की ऊंचाई के साथ उड़ान क्षमता जांचने के लिए अलग-अलग स्तरों पर परीक्षण किया गया. समुद्र तल पर इसने दो घंटे 22 मिनट, 12 हजार फीट की ऊंचाई पर एक घंटा 20 मिनट 33 सेकेंड और 14 हजार फीट पर एक घंटा 18 मिनट 26 सेकेंड की उड़ान दर्ज की.
85 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री
विजय जेड-1 का नवीनतम संस्करण जून 2026 में तैयार किया गया है. इसमें 85 फीसदी से अधिक स्वदेशी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है. ड्रोन का कार्बन फाइबर फ्रेम कंपनी की टीम ने खुद डिजाइन और विकसित किया है. कंपनी के अनुसार, ड्रोन पर एक हजार घंटे से अधिक ग्राउंड और क्रैश टेस्ट भी किये जा चुके हैं.
विजय जेड-1 अधिकतम 4,200 मीटर की ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है. इसकी रेंज 40 किलोमीटर है. वर्तमान में इसकी पेलोड क्षमता 500 ग्राम है, जिसे जरूरत के अनुसार 1.2 किलोग्राम तक बढ़ाया जा सकता है.
आइआइटी आइएसएम में इनक्यूबेट हुआ स्टार्टअप
विजय जेड-1 को विकसित करने वाली जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड आइआइटी आइएसएम के सेंटर ऑफ इनोवेशन, इन्क्यूबेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप में इनक्यूबेटेड स्टार्टअप है. कंपनी की स्थापना वर्ष 2025 में हुई थी. इसके सह-संस्थापक सौरव सिंह आइआइटी आइएसएम के 2020 बैच के छात्र रहे हैं. उन्होंने वर्ष 2022 में माइनिंग इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया है.
आइआइटी आइएसएम प्रबंधन ने पूर्व छात्र की उपलब्धि पर प्रसन्नता जतायी है. संस्थान के अनुसार, यह उपलब्धि उसके नवाचार और उद्यमिता पारिस्थितिकी तंत्र तथा राष्ट्रीय जरूरतों के लिए स्वदेशी तकनीक विकसित करने में पूर्व छात्रों की बढ़ती क्षमता को दर्शाती है.
वैलिडेशन टेस्टिंग के बाद इंडक्शन की उम्मीद
परीक्षण के बाद कंपनी को ड्रोन को सेना में जल्द शामिल किये जाने को लेकर रुचि मिली है. हालांकि, फिलहाल खरीद से पहले वैलिडेशन टेस्टिंग की प्रक्रिया चल रही है. इसलिए सेना में इसके औपचारिक इंडक्शन को अभी अंतिम रूप नहीं दिया गया है.
जेनिथ अनमैंड सिस्टम्स की मौजूदा उत्पादन क्षमता प्रतिमाह करीब 90 ड्रोन की बतायी गयी है. कंपनी अन्य अनमैंड सिस्टम और हाइब्रिड प्रोपल्शन तकनीक वाले ड्रोन के विकास पर भी काम कर रही है.
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