6G रिसर्च में IIT-ISM धनबाद की बड़ी उपलब्धि, डॉ. तमोघ्न ओझा की को-एडिटेड पुस्तक Springer Nature ने की प्रकाशित

आईआईटी (आईएसएम) धनबाद के डॉ. तमोघ्न ओझा ने 6जी रिसर्च के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है. उनकी सह-संपादन में तैयार 'एज-इनेबल्ड 6जी नेटवर्किंग' पुस्तक को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक स्प्रिंगर नेचर ने प्रकाशित किया है. यह पुस्तक एज कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी के 6जी वायरलेस नेटवर्क के बीच तालमेल पर केंद्रित है.

धनबाद. आईआईटी (आईएसएम) के मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. तमोघ्न ओझा ने 6जी रिसर्च के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है. उनके सह-संपादन में तैयार पुस्तक ‘एज-इनेबल्ड 6जी नेटवर्किंग: फाउंडेशंस, टेक्नोलॉजीज एंड एप्लीकेशंस’ को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशक स्प्रिंगर नेचर ने प्रकाशित किया है. पुस्तक में एज कंप्यूटिंग और अगली पीढ़ी के 6जी वायरलेस नेटवर्क के बीच तालमेल तथा इससे जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा की गयी है.

पांच विशेषज्ञों के साथ किया सह-संपादन

डॉ. तमोघ्न ओझा ने इस पुस्तक का सह-संपादन एसआरएम यूनिवर्सिटी-एपी के डॉ. एमडी मुजक्किर हुसैन, आईआईटी जम्मू के डॉ. समरेश बेरा, अमेरिका स्थित डैनफोर्थ प्लांट साइंस सेंटर के डॉ. नुर्जमान अहमद और आईआईटी खड़गपुर के प्रो. सुदीप मिश्रा के साथ किया है. पुस्तक में 6जी नेटवर्क के विकास में एज, फॉग और क्लाउड कंप्यूटिंग की भूमिका को विभिन्न तकनीकी और एप्लीकेशन संदर्भों में प्रस्तुत किया गया है.

आईआईटी आईएम के सहायक प्रोफेसर डॉ. तमोघना ओझा


लेटेंसी और रिलायबिलिटी सुधारने पर जोर

पुस्तक में एज, फॉग और क्लाउड कंप्यूटिंग को एकीकृत कर अलग-अलग एप्लीकेशन और क्वालिटी ऑफ सर्विस की जरूरतों को पूरा करने वाले 6जी नेटवर्क की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गयी है. एज-इनेबल्ड आर्किटेक्चर के माध्यम से नेटवर्क में लेटेंसी कम करने, रिलायबिलिटी और स्केलेबिलिटी बढ़ाने तथा डेटा रेट में सुधार से जुड़े पहलुओं को भी शामिल किया गया है.

इसमें 6जी सेवाओं के संदर्भ में ईएमबीबी, यूआरएलएलसी और एमएमटीसी जैसी तकनीकों और उनकी आवश्यकताओं पर भी चर्चा की गयी है. पुस्तक को शोधकर्ताओं, शिक्षाविदों और 6जी नेटवर्किंग से जुड़े तकनीकी क्षेत्र के लोगों के लिए उपयोगी संदर्भ के तौर पर तैयार किया गया है.

तीन प्रमुख सेक्शनों में बांटी गयी पुस्तक

पुस्तक को तीन प्रमुख हिस्सों में विभाजित किया गया है. इनमें 6जी कम्युनिकेशन फंडामेंटल्स, रेडियो एक्सेस नेटवर्क टेक्नोलॉजीज और कोर नेटवर्क टेक्नोलॉजीज शामिल हैं. इसके अलावा नेटवर्क वर्चुअलाइजेशन, फंक्शन प्लेसमेंट और आईओटी नेटवर्किंग जैसे विषयों को भी इसमें जगह दी गयी है. इन विषयों के माध्यम से 6जी नेटवर्क के आर्किटेक्चर और संभावित अनुप्रयोगों के विभिन्न पहलुओं को समझाने का प्रयास किया गया है.

पुस्तक एज-इनेबल्ड 6जी नेटवर्किंग: बुनियाद, प्रौद्योगिकियाँ और अनुप्रयोग

एआई, एज कंप्यूटिंग और 5जी-6जी पर कर रहे शोध

डॉ. तमोघ्न ओझा आईआईटी (आईएसएम) धनबाद में कंप्यूटिंग फॉर सिक्योर एंड इंटेलिजेंट नेटवर्क्स (कोसाइन) लैब का नेतृत्व करते हैं. संस्थान की ओर से दी गयी जानकारी के अनुसार, उन्होंने अब तक एक करोड़ रुपये से अधिक के शोध अनुदान हासिल किये हैं. उनका शोध एआई/एमएल फॉर आईओटी, एज कंप्यूटिंग, डिजिटल ट्विन, 5जी/6जी और फ्यूचर नेटवर्क जैसे क्षेत्रों पर केंद्रित है.

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लेखक के बारे में

By आशीष कुमार

आशीष कुमार प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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