मक्के की फसल में फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप, कृषि विभाग ने जारी की एडवाइजरी

धनबाद में मक्के की फसल पर फॉल आर्मी वर्म का प्रकोप तेज़ी से फैल रहा है. कृषि विभाग ने किसानों के लिए ज़रूरी एडवाइजरी जारी की है. जानिए कीट की पहचान, बचाव के उपाय और विशेषज्ञ सलाह.

धनबाद. जिले के विभिन्न प्रखंडों में मक्के की फसल पर फॉल आर्मी वर्म यानी स्पोडोप्टेरा फ्रूजीपर्डा के संक्रमण की सूचना के बाद कृषि विभाग ने किसानों के लिए एडवाइजरी जारी की है. विभाग ने किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने और शुरुआती अवस्था में ही कीट की पहचान कर नियंत्रण के उपाय अपनाने की सलाह दी है. कृषि विभाग के अनुसार फॉल आर्मी वर्म तेजी से फैलने वाला कीट है और मक्के की फसल को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. समय रहते नियंत्रण नहीं किये जाने पर संक्रमण तेजी से बढ़ने की आशंका रहती है.

31 से 35 दिन में पूरा होता है जीवन चक्र

कृषि विभाग के अनुसार फॉल आर्मी वर्म का जीवन चक्र करीब 31 से 35 दिनों में पूरा हो जाता है. मादा पतंगा अपने जीवनकाल में एक हजार से अधिक अंडे दे सकती है. इसके कारण शुरुआती संक्रमण की अनदेखी होने पर कम समय में कीटों की संख्या बढ़ सकती है.

मक्का इसका प्रमुख प्रभावित फसल है. इसके अलावा ज्वार, गन्ना, धान, गेहूं और घास कुल की कुछ अन्य फसलें भी इससे प्रभावित हो सकती हैं. विभाग ने किसानों को विशेष रूप से मक्के के खेतों की नियमित निगरानी करने की सलाह दी है.

शुरुआती अवस्था में लार्वा को करें नियंत्रित

कृषि विभाग ने किसानों को मक्के के पौधों और पत्तियों की नियमित जांच करने को कहा है. शुरुआती अवस्था में कीट या लार्वा दिखाई देने पर उन्हें हाथ से नष्ट करने और प्रभावित पौधों की निगरानी बढ़ाने की सलाह दी गयी है.

प्रारंभिक संक्रमण की स्थिति में नीम आधारित अजाडिरेक्टिन और जैविक कीटनाशकों के उपयोग को उपयोगी बताया गया है. विभाग ने किसानों को बिना विशेषज्ञ सलाह के रासायनिक कीटनाशकों का प्रयोग नहीं करने की सलाह दी है. दवाओं का चयन फसल की अवस्था और कीट के संक्रमण के स्तर के अनुसार किया जाना चाहिए.

10 से 20 प्रतिशत संक्रमण पर नियंत्रण जरूरी

विभाग के अनुसार फसल में फॉल आर्मी वर्म का संक्रमण 10 से 20 प्रतिशत से अधिक होने पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग किया जाना चाहिए. अधिक संक्रमण की स्थिति में स्पाइनेटोराम, क्लोरान्ट्रानिलिप्रोल तथा थायमेथोक्साम मिश्रित रासायनिक दवाओं के इस्तेमाल की सलाह दी गयी है.

पांचवें और छठे चरण के लार्वा की स्थिति में जहरीले चुग्गे के उपयोग की अनुशंसा की गयी है. हालांकि कीटनाशकों की मात्रा, उपयोग का तरीका और समय फसल की अवस्था तथा विभागीय अनुशंसा के अनुसार ही तय करने पर जोर दिया गया है.

कटाई के बाद गहरी जुताई की सलाह

कृषि विभाग ने फॉल आर्मी वर्म की रोकथाम के लिए एकीकृत कीट प्रबंधन अपनाने पर जोर दिया है. किसानों को कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करने की सलाह दी गयी है, ताकि मिट्टी में मौजूद कीट के विभिन्न चरण नष्ट किये जा सकें.

वयस्क कीटों की निगरानी के लिए फेरोमोन ट्रैप लगाने की भी सलाह दी गयी है. विभाग के अनुसार नियमित निगरानी, शुरुआती संक्रमण की पहचान और समय पर नियंत्रण उपाय अपनाकर फसल को होने वाले नुकसान को सीमित किया जा सकता है.

विशेषज्ञों से सलाह लेने की अपील

कनीय पौधा संरक्षण पदाधिकारी सह कीटनाशी निरीक्षक ने किसानों से फसल में कीट का प्रकोप दिखाई देने पर विशेषज्ञों से सलाह लेने की अपील की है. किसान कृषि विज्ञान केंद्र, बलियापुर और निकटवर्ती पौधा संरक्षण केंद्र से जानकारी प्राप्त कर सकते हैं.

इसके अलावा किसान कॉल सेंटर के टोल फ्री नंबर 1800-123-1136 पर संपर्क कर कृषि संबंधी सलाह ले सकते हैं. किसान सारथी और एनपीएसएस मोबाइल एप के माध्यम से भी फसल और कीट नियंत्रण से संबंधित जानकारी प्राप्त की जा सकती है. विभाग ने किसानों से समय रहते खेतों की निगरानी करने और विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही नियंत्रण उपाय अपनाने की अपील की है.

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By Shobhit ranjan

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