धनबाद के झरिया में 'हरित चेतना': पृथ्वी दिवस पर बच्चों ने अग्नि प्रभावित क्षेत्र में जगाई पर्यावरण की अलख

Earth day 2026: पृथ्वी दिवस के अवसर पर झरिया में एक अनूठा कार्यक्रम आयोजित किया गया, जहां अग्नि प्रभावित घोनूडीह क्षेत्र के बच्चों ने 'हरित चेतना' का संदेश दिया. आईएनए (INA) और सीसीसी (CCC) द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में नन्हे बच्चों ने सिर पर पृथ्वी का मॉडल रखकर जागरूकता रैली निकाली. 'वंदे मातरम्' के 150 वर्षों को पृथ्वी संरक्षण से जोड़ते हुए बच्चों ने धरती को पुनः हरा-भरा बनाने का संकल्प लिया.

Earth day 2026, धनबाद : पृथ्वी दिवस के मौके पर धनबाद के झरिया में पर्यावरण संरक्षण का एक अनूठा और भावुक नजारा देखने को मिला. इंस्टीट्यूशन फॉर नेशनल एमिटी (INA) और कोलफील्ड चिल्ड्रन क्लासेज (CCC) के संयुक्त प्रयासों से अग्नि प्रभावित घोनूडीह क्षेत्र में ‘हरित चेतना संदेश’ कार्यक्रम का आयोजन हुआ. इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण को ‘वंदे मातरम्’ की गौरवशाली 150वीं वर्षगांठ के साथ जोड़ना था.

मासूमों की रैली, नारों से गूंजा कोयलांचल

रैली की शुरुआत वसुंधरा वंदना के साथ हुई. केंदुआ की छात्राओं नंदिनी, दुर्गा, मुस्कान और दुर्गी ने ‘वंदे मातरम’ गीत पर मनमोहक नृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया. इसके बाद 30 से अधिक बच्चों ने सिर पर मिट्टी से बने पृथ्वी के मॉडल रखकर रैली निकाली. “वंदे मातरम हम खूब गाएंगे, धरती को भी हरा बनाएंगे” और “धरती माता का रूप वापस करो” जैसे नारों से पूरा घोनूडीह क्षेत्र गूंज उठा.

पृथ्वी मॉडल: धरती और दुर्गा की समानता का प्रतीक

कार्यक्रम में प्रदर्शित ‘पृथ्वी मॉडल’ आकर्षण का केंद्र रहा, जिसमें धरती माता को ही देवी दुर्गा का स्वरूप मानकर पूजनीय दिखाया गया. इस अद्भुत थीम को पिनाकी रॉय की परिकल्पना से कलाकार संजय पंडित ने आकार दिया था. यह मॉडल न केवल बच्चों के लिए, बल्कि क्षेत्र के लोगों के लिए भी श्रद्धा और पर्यावरण के प्रति सम्मान का प्रतीक बना.

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पर्यावरण संरक्षण का सामूहिक संकल्प

INA के संस्थापक पिनाकी रॉय ने कहा कि ‘वंदे मातरम’ का वास्तविक अर्थ तभी सार्थक होगा जब हम अपनी धरती को हरा-भरा और प्रदूषण मुक्त रखेंगे. उन्होंने बच्चों को पर्यावरण के प्रति जागरूक करते हुए उन्हें पेड़ लगाने और उसकी देखभाल करने की शपथ दिलाई. उन्होंने कहा कि अग्नि प्रभावित झरिया में शुद्ध हवा और स्वच्छ पर्यावरण आज की सबसे बड़ी जरूरत है.

राष्ट्रभक्ति और पर्यावरण का समापन

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ और ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन के साथ हुआ. इस अवसर पर पिनाकी रॉय, मौसुमी रॉय, संजय पंडित सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे. इस कार्यक्रम ने साबित कर दिया कि यदि बच्चों को सही दिशा और संस्कार दिए जाएं, तो वे आने वाले समय में धरती को बचाने की बड़ी भूमिका निभा सकते हैं.

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Published by: Sameer Oraon

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