Dhanbad News: धनबाद में हर साल 7000 प्री-टर्म बच्चों का जन्म, सीएचसी में केएमसी रूम की तैयारी

Dhanbad News: डीडीसी ने एसओपी का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने को कहा, बलियापुर सीएचसी में केएमसी रूम के लिए शीघ्र स्थल चयन करने का निर्देश.

धनबाद, जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में नवजात शिशुओं की बेहतर देखभाल के लिए कंगारू मदर केयर (केएमसी) रूम स्थापित करने की तैयारी है. पिछले दिनों उप विकास आयुक्त की अध्यक्षता में आयोजित समीक्षात्मक बैठक में यह सामने आया कि पूर्व में निर्देश दिये जाने के बावजूद जिले के किसी भी प्रखंड में केएमसी रूम का संचालन शुरू नहीं किया गया है. इस पर नाराजगी जताते हुए डीडीसी ने सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी प्रखंडों में जल्द से जल्द रूम की शुरुआत सुनिश्चित करें तथा निर्धारित स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) का पूरी तरह पालन किया जाए. बैठक में बलियापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में केएमसी रूम के लिए शीघ्र स्थल चयन करने का भी निर्देश दिया गया. साथ ही बीपीएम, बीएएम, पीएमयू तथा डीएमएफटी टीम को नियमित मॉनिटरिंग कर कार्य की प्रगति सुनिश्चित करने को कहा गया. स्वास्थ्य विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार धनबाद में हर साल 70 से 72 हजार बच्चों का जन्म होता है. इनमें औसतन 10 से 12 प्रतिशत बच्चे प्री-टर्म जन्म ले रहे है. इसे देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से सभी सीएचसी में केएमसी का निर्माण कराने की तैयारी है.

क्या है कंगारू मदर केयर

कंगारू मदर केयर एक ऐसी वैज्ञानिक और प्रभावी पद्धति है, जिसमें समय से पहले जन्मे (प्री-टर्म) या कम वजन वाले नवजात शिशु को मां के सीने से त्वचा के सीधे संपर्क (स्किन टू स्किन कां टेस्ट) में रखा जाता है. इससे बच्चे को शरीर की गर्माहट मिलती है और उसके शारीरिक व मानसिक विकास में मदद मिलती है.

केएमसी के प्रमुख लाभ

समय से पहले जन्मे और कम वजन वाले शिशुओं की मृत्यु दर में कमी आती है, नवजात के शरीर का तापमान सामान्य बनाए रखने में मदद मिलती है, स्तनपान को बढ़ावा मिलता है और बच्चे को पर्याप्त पोषण मिलता है, संक्रमण का खतरा कम होता है तथा रोग प्रतिरोधक क्षमता बेहतर होती है, बच्चे का वजन तेजी से बढ़ता है और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि कम हो सकती है, मां और शिशु के बीच भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है, जिससे दोनों के मानसिक स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है व परिवार की आर्थिक लागत भी कम होती है क्योंकि महंगे उपकरणों पर निर्भरता घटती है.

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