धनबाद में अवैध लॉटरी का जाल, 2200 लोगों के जुड़े होने का दावा; पुलिस बोली- नहीं बख्शेंगे

धनबाद में लॉटरी पर प्रतिबंध के बावजूद रोज दो करोड़ का अवैध कारोबार जारी है. मैथन से संचालित इस सिंडिकेट और नेटवर्क का पूरा खुलासा यहां पढ़ें.

झारखंड में लॉटरी पर प्रतिबंध है, पर सिर्फ कागज पर. धनबाद में इसका अवैध कारोबार धड़ल्ले से जारी है. प्रभात खबर की पड़ताल में सामने आया है कि जिले में रोज तीन बार लॉटरी का ड्रॉ कराया जाता है और प्रत्येक ड्रॉ में करीब 60 से 80 लाख रु तक के टिकट बिकने का दावा है.

इस हिसाब से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ और सालाना करीब 730 करोड़ रु के अवैध कारोबार का अनुमान है. स्थानीय सूत्रों के अनुसार, इस पूरे धंधे से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब 2200 लोग जुड़े हैं.

नेटवर्क का एपिसेंटर है मैथन

पड़ताल में यह भी सामने आया कि मैथन को इस नेटवर्क का प्रमुख केंद्र बनाया गया है. यहां से धनबाद शहर और कोयलांचल के विभिन्न इलाकों में लॉटरी टिकट की आपूर्ति की जाती है. पान दुकानों, गुमटियों, ठेलों और राशन दुकानों तक पर टिकट उपलब्ध होने की बात सामने आयी है. ग्राहकों को खुले तौर पर टिकट बेचने के बजाय कई जगह कोड वर्ड का इस्तेमाल किया जाता है.

बंगाल से लाकर मैथन-निरसा में किया जाता है स्टॉक

स्थानीय सूत्रों के अनुसार, अधिकांश टिकट पश्चिम बंगाल से धनबाद पहुंचते हैं. खेप को पहले मैथन और निरसा के आसपास के ठिकानों पर रखा जाता है. इसके बाद अलग-अलग इलाकों के डीलरों और विक्रेताओं तक पहुंचाया जाता है. नेटवर्क में खेप लाने, स्टॉक रखने और वितरण की जिम्मेदारी अलग-अलग लोगों को दी गयी है.

मैथन के ग्रुप की भूमिका आ रही सामने

पड़ताल में स्थानीय स्तर पर मैथन के दीपक ग्रुप की भूमिका होने की बात भी सामने आयी है. हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है. सूत्रों के अनुसार, मुख्य संचालकों के नीचे क्षेत्रवार डीलर और उनके अधीन छोटे विक्रेताओं का नेटवर्क काम करता है.

हर ड्रॉ से 15 मिनट पहले भेजते हैं बिक्री का हिसाब

स्थानीय जानकारी के मुताबिक लॉटरी टिकट पांच, 10 और 12 सेट के संयोजन में उपलब्ध कराये जाते हैं. प्रत्येक ड्रॉ से करीब 15 मिनट पहले विक्रेता बची हुई टिकटों की तस्वीर मुख्य संचालकों को भेजते हैं. इससे बिक्री और शेष टिकटों का हिसाब मिलाया जाता है. एक ड्रॉ में 60 से 80 लाख रुपये तक के टिकट बिकने का दावा किया गया है.

भंडाफोड़ के बाद भी नेटवर्क चालू

बीते दिनों चिरकुंडा में पुलिस ने छापेमारी कर नकली लॉटरी टिकट छापने वाले गिरोह का खुलासा किया था. पुलिस ने डियर, ड्रीम समेत कई कंपनियों के नाम से छापे गये टिकट और प्रिंटिंग मशीनें बरामद कीं थीं. पुलिस के अनुसार गिरोह एक लाख रुपये तक के इनाम वाली नकली लॉटरी तैयार कर दिन में दो बार ड्रॉ कराता था. जांच में गिरोह के सदस्यों के अन्य जिलों तक संपर्क की बात भी सामने आयी थी.

जानें क्या कहता है कानून

लॉटरी (विनियमन) अधिनियम, 1998 और संबंधित प्रावधानों के तहत अवैध लॉटरी के संचालन, बिक्री और वितरण पर कार्रवाई का प्रावधान है. प्रतिबंधित लॉटरी के कारोबार में शामिल लोगों पर कानूनी कार्रवाई और दंड का प्रावधान है.

अवैध कारोबारी बख्शे नहीं जायेंगे : एसएसपी

एसएसपी प्रभात कुमार ने कहा, अवैध लॉटरी के खिलाफ धनबाद पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है. पिछले दिनों चिरकुंडा में अवैध लॉटरी के कारोबार का खुलासा किया गया था. सूचना मिलने पर आगे भी कार्रवाई जारी रहेगी. इस धंधे में शामिल अवैध कारोबारियों को बख्शा नहीं जायेगा.


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By Niraj ambasta

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