धनबाद सदर अंचल के मौजा बारामुड़ी में सैनिक बंदोबस्ती के तहत कर्नल जीवन कुमार सिंह को आवंटित 2.12 एकड़ सरकारी जमीन को सरकार को वापस करने की प्रक्रिया में ऑनलाइन भू-अभिलेखों की कई संदिग्ध प्रविष्टियां सामने आयी हैं. अंचल अधिकारी की ओर से अपर समाहर्ता, धनबाद को भेजी गयी रिपोर्ट में अभिलेखों की स्थिति को संदिग्ध बताते हुए विस्तृत जांच की जरूरत बतायी गयी है.
रिपोर्ट में तीन ऑनलाइन कायम जमाबंदियों को बिहार भूमि सुधार अधिनियम के तहत विलोपित या रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने के लिए उपायुक्त से अनुमति लेने की अनुशंसा की गयी है. साथ ही जमीन को झारखंड के राज्यपाल के नाम दर्ज करने की अनुशंसा की गयी है.
कर्नल को आवंटित थी 2.12 एकड़ जमीन
अंचल कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार बारामुड़ी मौजा संख्या-03 में पुराना खाता संख्या-42 और प्लॉट संख्या-280 की कुल 18.12 एकड़ जमीन का हाल सर्वे हुआ था. हाल सर्वे में खाता संख्या-55 और प्लॉट संख्या-499/759 का रकबा 2.12 एकड़ है.
यह जमीन सैनिक बंदोबस्ती के तहत कर्नल जीवन कुमार सिंह, पिता प्रह्लाद प्रसाद सिंह को आवंटित की गयी थी. बाद में इसे स्वेच्छा से सरकार को वापस करने के लिए प्रमाण-पत्र जारी करने के संबंध में अपर समाहर्त्ता कार्यालय से निर्देश प्राप्त हुआ था.
आम सूचना के बाद दो लोगों ने किया दावा
सरकार को जमीन वापस करने की प्रक्रिया के दौरान अंचल कार्यालय की ओर से आम सूचना जारी कर दावेदारों से संबंधित दस्तावेज मांगे गये थे. इसके बाद दुर्गा विश्वकर्मा और काशी ठाकुर ने जमीन पर अपना दावा करते हुए आवेदन दिया.
दुर्गा विश्वकर्मा ने निबंधित डाक से, जबकि काशी ठाकुर ने स्वयं अंचल कार्यालय पहुंचकर आवेदन जमा किया. रिपोर्ट के अनुसार दोनों दावेदारों ने अपने दावे के समर्थन में पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किये.
पंजी-11 में कई व्यक्तियों और कंपनी के नाम प्रविष्टि
दावों की जांच के दौरान झारभूमि पोर्टल पर उपलब्ध पंजी-11 और पंजी-2 के अभिलेखों की पड़ताल की गयी. पंजी-11 में खाता संख्या-55, प्लॉट संख्या-499/759 की 2.12 एकड़ जमीन कर्नल जीवन कुमार सिंह के नाम दर्ज मिली.
वहीं इसी खाता संख्या से जुड़ी अन्य प्रविष्टियों में शंकर दयाल सिंह के नाम 7.07 डिसमिल, जबकि शारदा सिंह, ममता झा और ममता गुप्ता के नाम भी अलग-अलग प्रविष्टियों में जमीन दर्ज मिली. इसके अलावा 16.5 डिसमिल और 33 डिसमिल जमीन एजी कोल सेल्स प्राइवेट लिमिटेड के नाम दर्ज मिली. कंपनी की प्रविष्टि में निदेशक अशोक कुमार गुप्ता और उनकी पत्नी सुधा गुप्ता का उल्लेख है.
पंजी-2 में केवल कर्नल के नाम अधिकार अभिलेख ऑनलाइन पंजी-2 की जांच में खाता संख्या-55 से संबंधित अधिकार अभिलेख में प्लॉट संख्या-449/759 का 2.12 एकड़ रकबा केवल कर्नल जीवन कुमार सिंह के नाम दर्ज पाया गया. पंजी-11 की कुछ प्रविष्टियों और पंजी-2 के अधिकार अभिलेख में अंतर मिला है.
रिपोर्ट में शंकर दयाल सिंह के नाम दर्ज एक प्रविष्टि को विशेष रूप से संदिग्ध बताया गया है, क्योंकि संबंधित प्लॉट संख्या खाता संख्या-55 में दर्ज नहीं है. इससे ऑनलाइन अभिलेखों में बाद में दर्ज की गयी प्रविष्टियों की वैधता पर सवाल खड़े हुए हैं.
तीन जमाबंदियां रद्द करने की अनुशंसा
तीन जमाबंदियां रद्द करने की अनुशंसा अंचल अधिकारी ने उपायुक्त से तीन ऑनलाइन कायम जमाबंदियों को बिहार भूमि सुधार अधिनियम के तहत विलोपित या रद्द करने की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति देने की अनुशंसा की है. साथ ही यह जांच कराने की जरूरत बतायी गयी है कि अन्य नामों पर ऑनलाइन जमाबंदियां किस पदाधिकारी या कर्मी ने, किस आधार और किन दस्तावेजों के आधार पर दर्ज कीं. नामांतरण से जुड़े मामलों की भी जांच प्रस्तावित है. रिपोर्ट में 2.12 एकड़ जमीन को झारखंड के राज्यपाल के नाम दर्ज करने की अनुशंसा की गयी है.
