Dhanbad News: डिजिटल जनगणना में मैपिंग की तकनीकी अड़चन, 4.24 लाख मकानों की गणना में चुनौती

Dhanbad News: पहली बार डिजिटल जनगणना, मैप व जमीनी हकीकत में नहीं बैठ रहा सामंजस्य, प्रगणकों को फील्ड में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

धनबाद, भारत की 16वीं व स्वतंत्रता के बाद की आठवीं जनगणना इस बार कई मायनों में ऐतिहासिक है. देशभर में पहली बार पूरी तरह डिजिटल माध्यम से करायी जा रही जनगणना के दौरान मैप मिलान की समस्या सामने आ रही है. धनबाद जिले में लगभग 4.24 लाख मकानों की गणना, पहचान व नंबरिंग की जानी है, लेकिन डिजिटल मैप और वास्तविक स्थिति में अंतर के कारण प्रगणकों को फील्ड में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कई स्थानों पर मैप में दर्ज मकान और मौके पर मौजूद मकान की स्थिति अलग मिल रही है, जिससे गणना कार्य की गति प्रभावित हो रही है.

लोगों के चयनित लोकेशन व वास्तविक पते में मिल रहा अंतर

डिजिटल जनगणना में पहली बार नागरिकों को मैप के माध्यम से अपने घर की लोकेशन चिन्हित करने का विकल्प दिया गया है. प्रगणकों के अनुसार बड़ी संख्या में ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जहां लोगों द्वारा चयनित लोकेशन और वास्तविक मकान का पता अलग-अलग मिल रहा है. कई मकानों का स्थान मैप पर कुछ मीटर से लेकर सैकड़ों मीटर तक इधर-उधर दर्ज है. ऐसे में प्रगणकों को मौके पर पहुंचकर दोबारा सत्यापन करना पड़ रहा है, जिससे प्रति घर लगने वाला समय बढ़ गया है.

नयी कॉलोनियां, अपार्टमेंट व बस्तियां पुराने नक्शे में नहीं

धनबाद शहर, झरिया, सिंदरी, निरसा, गोविंदपुर व आसपास के क्षेत्रों में पिछले एक दशक के दौरान बड़ी संख्या में नई कॉलोनियां, अपार्टमेंट और आवासीय बस्तियां विकसित हुई हैं. लेकिन कई डिजिटल नक्शे पुराने रिकॉर्ड पर आधारित होने के कारण इन नए निर्माणों को पूरी तरह नहीं दर्शा रहे हैं. कुछ क्षेत्रों में पुराने मकानों की जगह बहुमंजिला इमारतें बन चुकी हैं, जबकि कई नई बस्तियां अभी तक मैप में दर्ज नहीं हैं. यही कारण है कि प्रगणकों को फील्ड में जाकर मैप अपडेट करने और वास्तविक स्थिति का सत्यापन करने में अतिरिक्त समय लग रहा है.

प्रवासी मजदूरों का सटीक आंकड़ा जुटाना भी चुनौतीपूर्ण

देश के प्रमुख कोयला व औद्योगिक जिलों में शामिल धनबाद में बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर रहते हैं. बीसीसीएल, इसीएल, रेलवे, निर्माण कार्य और अन्य उद्योगों से जुड़े हजारों श्रमिक किराये के मकानों और अस्थायी बस्तियों में निवास करते हैं. इनमें से कई परिवार रोजगार के अनुसार समय-समय पर स्थान बदलते रहते हैं. ऐसे में वास्तविक निवासियों की संख्या, परिवार संरचना और प्रवास संबंधी जानकारी जुटाना जनगणना टीमों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.

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