राष्ट्रीय भुइयां विकास समिति के बोर्रागढ़, झरिया स्थित केंद्रीय कार्यालय में सोमवार को महान समाजसेवी और माउंटेन मैन बाबा दशरथ मांझी का महापरिनिर्वाण दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया. कार्यक्रम की अध्यक्षता राष्ट्रीय अध्यक्ष गणेश भूईयां ने की.
असंभव को संभव कर दिखाया
बतौर विशेष अतिथि बहुजन आर्मी व बहुजन मीडिया हाउस के झारखंड प्रभारी रामाशीष चौहान ने कहा दशरथ मांझी ने एक हथौड़ा और छेनी से अकेले 22 वर्षों में पहाड़ काटकर रास्ता बना दिया. वर्षों की मेहनत से उन्होंने असंभव को संभव कर दिखाया और दुनिया के सामने मानव संकल्प की मिसाल कायम की.
19 सालों बाद भी नहीं मिला सम्मान
उन्होंने कहा कि महापरिनिर्वाण के 19 वर्ष बाद भी देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न उन्हें नहीं मिला है. बहुजन समाज की ओर से भारत सरकार से मांग है कि जनहित में उनके कार्यों को देखते हुए बाबा दशरथ मांझी को भारत रत्न देकर बहुजनों का गौरव बढ़ाया जाए. यदि सम्मान का पैमाना संघर्ष और राष्ट्र-समाज के लिए योगदान है, तो जाति और सामाजिक पृष्ठभूमि आड़े नहीं आनी चाहिए. बाबा दशरथ मांझी मुसहर समाज से हैं. यदि वंचित और हाशिए पर रहे समुदायों के महान नायकों को सम्मान नहीं मिलता है तो व्यवस्था पर सवाल उठना लाजमी है.
हौसला पहाड़ को भी झुका सकता है
वक्ताओं ने कहा बाबा का जीवन सिखाता है कि हौसला के सामने पहाड़ को भी रास्ता देना पड़ता है. उनके आदर्शों पर चलकर ही हम देश के विकास में अहम भूमिका निभा सकते हैं. मौके पर मिथिलेश भूईयां, रवींद्र प्रसाद, राज कुमार दास, कमल भूईयां, कामेश्वर भूईयां, सुरेंद्र भूईयां, अर्जुन भूईयां, राम लखन राम, इंद्रदेव भूईयां, राम जी भूईयां, राजेश कुमार, शनिचर भूईयां, आजाद कुमार, लखन भूईयां, रितेश कुमार, सतीश कुमार, बाल्मीकि पासवान, अमल दास, माथुर महतो, उत्तम बाउरी, काजल बाउरी आदि उपस्थित थे.
