धनबाद से विक्की प्रसाद की रिपोर्ट
Dhanbad News: साइबर अपराधियों ने लोगों को ठगी का शिकार बनाने के लिए अब एक नया तरीका अपनाया है. ताजा मामले में एक व्यक्ति को फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताने वाले ठगों ने उनके बेटे के गैंगरेप के मामले में गिरफ्तार होने का झूठा दावा किया. बेटे जैसी आवाज सुनाकर परिजनों को डराने और उनसे पैसे ऐंठने की कोशिश की गयी, लेकिन परिवार की सूझबूझ के कारण साइबर अपराधियों की पूरी योजना विफल हो गयी.
फोन कर खुद को पुलिस अधिकारी बताया
सूर्या हाईलैंड सिटी निवासी नीरज पाठक ने साइबर पुलिस को दी गयी शिकायत में बताया कि बुधवार की सुबह करीब 9.45 से 10 बजे के बीच उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से कॉल आया. फोन करने वाले व्यक्ति ने खुद को पुलिस थाने का अधिकारी बताते हुए पूछा कि क्या अंश पाठक उनका बेटा है. पुष्टि होने के बाद उसने कहा कि अंश को एक लड़की के गैंगरेप मामले में गिरफ्तार किया गया है और वह फिलहाल थाने में बैठा है.
बेटे जैसी आवाज सुनाकर डराने की कोशिश
फोन करने वाले ने यह भी कहा कि अंश ने ही उनका मोबाइल नंबर दिया है और वह उनसे बात करना चाहता है. इसके बाद फोन पर एक युवक की आवाज सुनाई दी, जो काफी हद तक उनके बेटे की आवाज जैसी लग रही थी. वह रोते हुए ‘डैडी-डैडी’ कहकर बात कर रहा था. अचानक मिली इस जानकारी से नीरज पाठक घबरा गये और स्थिति को समझने का प्रयास करने लगे.
पुणे में मौजूद मां ने खोली ठगी की पोल
इसी दौरान नीरज पाठक की पत्नी पुणे से घर में लगे सीसीटीवी कैमरे के माध्यम से पूरी बातचीत सुन रही थीं. संयोग से उनका बेटा अंश उसी समय पुणे में अपनी मां के साथ मौजूद था. ऐसे में उन्हें तुरंत समझ में आ गया कि यह साइबर अपराधियों की चाल है. उन्होंने तत्काल घर में मौजूद सहायक के मोबाइल पर संपर्क कर नीरज पाठक को जानकारी दी कि पूरा कॉल फर्जी है.
नहीं साझा की निजी जानकारी, बच गया आर्थिक नुकसान
पत्नी से सूचना मिलने के बाद नीरज पाठक ने तुरंत कॉल काट दिया. उन्होंने किसी भी तरह की व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते का विवरण, ओटीपी या धनराशि किसी के साथ साझा नहीं की. इस वजह से किसी प्रकार का आर्थिक नुकसान नहीं हुआ. आखिर घबराहट में लोग अक्सर ऐसी गलतियां कर बैठते हैं, जिनका फायदा साइबर अपराधी उठाते हैं. इस बार अपराधियों का दांव उल्टा पड़ गया.
साइबर पुलिस से की शिकायत
घटना के बाद नीरज पाठक ने साइबर पुलिस से संपर्क किया. उन्हें राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सलाह दी गयी, लेकिन पोर्टल बार-बार तकनीकी समस्या के कारण काम नहीं कर रहा था. इसके बाद उन्होंने लिखित शिकायत देकर मामले की जांच करने और संबंधित मोबाइल नंबर के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है.
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सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे बड़ा उपाय
विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह के मामलों में घबराने के बजाय पहले संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क कर जानकारी की पुष्टि करनी चाहिए. किसी भी स्थिति में ओटीपी, बैंक विवरण या पैसे साझा नहीं करने चाहिए. साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपना रहे हैं, लेकिन थोड़ी सतर्कता उनके मंसूबों पर पानी फेर सकती है. आखिर ठगों की कल्पनाशक्ति कभी-कभी फिल्मों के पटकथा लेखकों से भी ज्यादा सक्रिय हो जाती है.
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