झारखंड के इस गांव में पीएम आवास की राशि जा रही दूसरे के खाते में, बुनियादी सुविधाओं का भी है अभाव

धनबाद के कुर्मीडीह व कोरियाटांड़ गांव का हाल बेहाल है. बुनियादी सुविधाओं का अभाव आज भी है. बांस-बल्ले के सहारे किसी तरह बिजली मिल रही है. प्रधानमंत्री आवास की राशि दूसरे के खाते में जा रही है. आज भी 150 वृद्ध पेंशन की राह ताकते नजर आ रहे हैं. इसके बावजूद इस गांव का सुध किसी ने नहीं लिया.

Common Man Issue: झारखंड के धनबाद जिला का कुर्मीडीह और कोरियाटांड़ गांव में आज भी बुनियादी सुविधाओं को अभाव है. बांस-बल्ले के सहारे किसी तरह बिजली का सुख लेते हैं, लेकिन पेयजल की सुविधा नहीं के बराबर है. सबसे खराब स्थिति यहां के वृद्धजनों का है. आज भी 150 वृद्ध पेंशन से वंचित हैं. वहीं, प्रधानमंत्री आवास की राशि दूसरें के खाते में भेजी जा रही है. इसके बावजूद इस परेशानी को लेकर किसी का ध्यान नहीं जा रहा है.

पीएम आवास की आस में टूटे घर में कट रही जिंदगी

धनबाद के कुर्मीडीह व कोरियाटांड़ में आज भी कई लोग मिट्टी व खपरैल के टूटे घर में जिंदगी बिताने को विवश हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि उनके लिए स्वीकृत प्रधानमंत्री आवास योजना की पहले किस्त की राशि दूसरे के खाते में भेज दी गयी है. इनमें विकास मंडल, पलटन मंडल, छत्रधारी दास, सहदेव दास, छोटू महली व समिता देवी शामिल हैं. मुखिया प्रतिनिधि के अनुसार गांव के 170 लोगों का चयन पीएम आवास के लिए किया गया है. इनमें 56 को पहली किस्त की राशि मुहैया करायी गयी है.

पेंशन से वंचित हैं 150 वृद्ध

धनबाद जिला मुख्यालय से मात्र 15 किलोमीटर दूर है बरवाअड्डा की बड़ा पिछड़ी पंचायत का कुर्मीडीह और कोरियाटांड़ गांव. सरकारी कागजों पर चाहे जो भी हो, पर हकीकत में लगभग सभी सरकारी योजनाओं का हाल यहां बुरा है. एक साल से 150 वृद्ध सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद भी पेंशन से वंचित हैं. घर-घर पानी पहुंचाने के लिए दो साल पहले ही जलमीनार बन गया, घर-घर पानी के लिए पाइप लाइन से कनेक्शन भी जोड़ दिया गया. लेकिन आज तक सप्लाई का पानी घर तक नहीं पहुंचा. चापानल के सहारे ग्रामीण पानी की जरूरत पूरी कर रहे हैं. हद तो यह कि प्रधानमंत्री की महत्वाकांक्षी योजना पीएम आवास के लिए चयनित लाभुकों के लिए स्वीकृत पहली किस्त की राशि भी दूसरे के खाते में भेज दी गयी. भले कागज पर उनका नाम है, पर वो आज भी झोपड़ियों में रह रहे हैं. सड़क आदि मूलभूत सुविधाओं का भी पूरा लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा.

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कई टोले में नाली नहीं, सड़कों पर बहता है पानी

कुर्मीडीह व कोरियाटांड़ गांव के कई टोले ऐसे हैं जहां नाली की कोई व्यवस्था नहीं है. घरों से निकलने वाला पानी सड़कों पर बहते रहता है. इस कारण पूरा इलाका गंदगी से भर गया है.

इलाज कराने 15 किलोमीटर जाते हैं लोग

कुर्मीडीह व कोरियाटांड़ की आबादी करीब 40 हजार है. पर स्वास्थ्य केंद्र नहीं होने से इलाज के लिए लगभग 15 किलोमीटर दूर गोविंदपुर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जाना पड़ता है. अगर स्थिति गंभीर हुई तो परेशानी और बढ़ जाती है.

खुद ही बंद हो जाता है पेंशनधारकों का खाता

कुर्मीडीह व कोरियाटांड़ के 150 से ज्यादा वृद्ध अगर पेंशन शुरू होने का इंतजार कर रहे हैं, तो कई ऐसे हैं जिन्हें नियमित रूप से पेंशन आज तक नहीं मिली. प्रखंड कार्यालय इनके गांव से लगभग 15 किलोमीटर दूर है. वहां वो जाते हैं और निराश लौट जाते हैं. कई बार तो खुद ही पेंशन खाता बंद हो जाता है. बाद में आवेदन देकर खाता शुरू कराते हैं.

बांस-बल्ले के सहारे बिजली आपूर्ति

कुर्मीडीह व कोरियाटांड़ में कई टोले ऐसे हैं, जहां आज भी बांस और बल्ले के सहारे लोगों के घरों तक बिजली पहुंच रही है. ऐसे में आये दिन हादसे की आशंका बनी रहती है. ग्रामीणों के अनुसार दो साल पहले बरसात के दौरान बिजली का तार गिरने से एक युवक करंट की चपेट में आकर घायल हो चुका है. इस पर हंगामा हुआ, तो बिजली विभाग के अधिकारियों ने गांव का दौरा किया, लेकिन व्यवस्था में अबतक कोई बदलाव नहीं हुआ.

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डेढ़ साल बाद भी जलापूर्ति नहीं हो सकी शुरू

हर घर नल-जल योजना के तहत कुर्मीडीह व कोरियाटांड़ में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग द्वारा जलमीनार बनाया गया है. स्थानीय लोगों के अनुसार डेढ़ साल पहले यह बनकर तैयार हो गया. पाइप लाइन बिछाने का काम भी छह से सात माह पूर्व पूरा कर लिया गया है, पर अभी तक पानी की सप्लाई नहीं हो सकी है.

रिपोर्ट : विक्की प्रसाद, कुर्मीडीह, धनबाद.

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By Samir Ranjan

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