भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) ने बुधवार को भोजूडीह स्थित कोकिंग कोल वाशरी का व्यावसायिक परिचालन शुरू कर दिया. वाशरी की क्षमता 2.0 एमटीपीए यानी 20 लाख टन प्रतिवर्ष है. इस पहल का उद्देश्य इस्पात क्षेत्र को धुले हुए कोकिंग कोयले की आपूर्ति बढ़ाना है. कोकिंग कोयला इस्पात उत्पादन में इस्तेमाल होने वाला एक महत्वपूर्ण कच्चा माल है. इस वाशरी की शुरुआत ऐसे समय में हुई है, जब भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए कोकिंग कोयले के आयात पर काफी निर्भर है, जिसपर काफी विदेशी मुद्रा खर्च होती है. कंपनी ने बीएसइ को भेजी सूचना में कहा कि भोजूडीह कोल वाशरी का व्यावसायिक परिचालन 26 मई से शुरू हो गया है. यह नयी सुविधा मध्यम क्षमता वाली तीन-उत्पाद की कोकिंग कोयला वाशरी है, जिसकी कच्चे कोयले की धुलाई क्षमता 20 लाख टन सालाना है.
स्टील सेक्टर को मिलेगा उच्च गुणवत्ता का धुला कोयला
बीसीसीएल के अनुसार, इस वाशरी का निर्माण बनाओ, चलाओ और देखरेख करो (बीओएम) मॉडल के तहत एसीबी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने किया है. करीब 341 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस वाशरी में कोयले की गुणवत्ता सुधारने के लिए हैवी मीडियम साइक्लोन, स्पाइरल कंसंट्रेटर और फ्रोथ फ्लोटेशन जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल होगा. इससे कोकिंग कोयले का बेहतर शोधन कर उच्च गुणवत्ता वाला धुला कोयला तैयार किया जायेगा, जो इस्पात उद्योग के लिए लाभकारी होगा. बीसीसीएल के सीएमडी मनोज अग्रवाल ने कहा कि आधुनिक तकनीकों से लैस भोजूडीह वाशरी बीसीसीएल की उत्पादन क्षमता और गुणवत्ता सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है. इससे इस्पात क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी. देश की ऊर्जा एवं औद्योगिक मजबूती को भी बल मिलेगा.
