कोयला के ग्रेड में हेराफेरी, 5 साल में झारखंड सरकार को 58 करोड़ का नुकसान

Coal India News: कोयला के ग्रेड में हेराफेरी की वजह से झारखंड सरकार के 5 साल में 58 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है. सीएजी की रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है. मामला वर्ष 2017 से 2022 के बीच का है. कैग ने कहा है कि धनबाद और चतरा जिले में 16 पट्टेदारों और 4 वाशरी यूनिट्स की जांच में इसका पता चला है. रिपोर्ट में जी-10 ग्रेड के कोयले को जी-11 ग्रेड का दिखाया गया है.

Coal India News: कोयले के ग्रेड में हेरफेरी व माइनिंग विभाग की लापरवाही से झारखंड सरकार को करीब 58.39 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ है. यह खुलासा कैग (महालेखाकार) की एक ऑडिट रिपोर्ट से हुआ है. इसके मुताबिक, धनबाद और चतरा जिले के सिर्फ 16 पट्टेदारों और 4 वाशरी यूनिट्स की जांच में यह गड़बड़ी उजागर हुई है. इसमें सर्वाधिक नुकसान धनबाद जिले से होने की बात सामने आयी है.

5 साल में 106.17 लाख एमटी कोयले का किया डिस्पैच

ऑडिट रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2017 से वर्ष 2022 तक की अवधि में इन पट्टेदारों द्वारा 106.17 लाख मीट्रिक टन (एमटी) कोयले का डिस्पैच किया. इस पर 232.73 करोड़ रुपए राजस्व की वसूलनी होनी चाहिए थी. विभाग ने 174.34 करोड़ रुपए ही वसूले की गयी. इसमें धनबाद जिले के 12 पट्टेदारों पर 33.28 करोड़ रुपए, दो अन्य पट्टेदारों पर 6.36 करोड़ और एक अन्य पट्टेदार पर 10.37 करोड़ रुपए कम राजस्व की वसूली की गयी है. इस गड़बड़ी से डीएमएफटी में 17.52 करोड़ रुपए व एनएमइटी मद में 1.17 करोड़ रुपए का भी नुकसान हुआ है.

14.78 करोड़ की बजाय 4.41 करोड़ के राजस्व की वसूली

धनबाद के एक मामले में एस-1 ग्रेड कोयले का मूल्य 1914.12 रुपए प्रति एमटी होने के बावजूद, इसकी गणना 571.20 रुपए प्रति एमटी के हिसाब से की गयी. इस कारण अप्रैल 2017 से जून 2017 तक डिस्पैच किये गये 0.77 लाख मीट्रिक टन कोयले पर केवल 4.41 करोड़ रुपए रॉयल्टी लगायी गयी, जबकि सही मूल्य के आधार पर 14.78 करोड़ रुपए के राजस्व की वसूली होनी चाहिए थी. सिर्फ इस मामले में 10.37 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हुआ.

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जी-10 ग्रेड को रिटर्न में जी-11 ग्रेड दिखाया गया

इसी तरह, चतरा जिला में स्थित अम्रपाली ओपन कास्ट प्रोजेक्ट से अप्रैल 2017 से दिसंबर 2019 के बीच 39.05 लाख एमटी कोयला डिस्पैच किया गया, जो वास्तव में जी-10 ग्रेड का था. लेकिन, रिटर्न में इसे जी-11 ग्रेड दर्शाया गया. जिससे 3.83 करोड़ रुपए की रॉयल्टी कम वसूली गयी.

अब भी बनी हुई हैं ऑफलाइन रिटर्न पर निर्भरता

कैग की रिपोर्ट बताया गया कि कोयला कंपनियों की ऑनलाइन मासिक रिटर्न प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जिम्मस पोर्टल की शुरुआत की गयी थी. उक्त पोर्टल की खामियों के कारण अब भी ऑफलाइन रिटर्न पर ही निर्भरता बनी हुई है. ऑनलाइन रिटर्न में नोटिफाइड प्राइस, इन्वॉयस प्राइस और रॉयल्टी की पूरी जानकारी नहीं होती, जिससे मूल्यांकन में गड़बड़ियां हो रही हैं.

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By Mithilesh Jha

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