धनबाद. देश के कुल कोयला उत्पादन में करीब तीन-चौथाई हिस्सेदारी रखनेवाली कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) पारंपरिक खनन से आधुनिक और तकनीक आधारित माइनिंग की ओर बढ़ रही है. कंपनी भूमिगत (यूजी) और खुली खदानों (ओसी) दोनों में आधुनिक मशीनों के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआइ), इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आइओटी), ड्रोन, जीआइएस, 5जी और डेटा एनालिटिक्स जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ा रही है. कोयला मंत्रालय की ओर से मंगलवार को जारी जानकारी के अनुसार, इन तकनीकों का इस्तेमाल उत्पादन और दक्षता बढ़ाने के साथ खदानों में सुरक्षा और पर्यावरणीय प्रबंधन बेहतर करने के उद्देश्य से किया जा रहा है.
42 घनमीटर फावड़े और 240 टन के डंपर
खुली खदानों में सीआइएल 42 घनमीटर क्षमता वाले फावड़े और 240 टन क्षमता के डंपर समेत हाई-कैपेसिटी हेवी अर्थ मूविंग मशीनरी तैनात कर रही है. विस्फोट-मुक्त खनन को बढ़ावा देने के लिए सरफेस माइनर का इस्तेमाल भी बढ़ाया जा रहा है.
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मंत्रालय के अनुसार, सरफेस माइनर के इस्तेमाल से धूल, शोर और कंपन में कमी के साथ कोयले की गुणवत्ता और रिकवरी बेहतर करने में मदद मिल सकती है. मशीनों में एआइ आधारित ऑपरेटर थकान निगरानी, 360 डिग्री कैमरा, निकटता चेतावनी तथा स्वचालित आग की पहचान और नियंत्रण जैसी सुविधाएं भी जोड़ी जा रही हैं.
यूजी खदानों में लॉन्गवॉल तकनीक पर जोर
भूमिगत खदानों में निरंतर खनन, लॉन्गवॉल और हाइवॉल तकनीक के माध्यम से उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है. बेहतर ग्रेड के कोयले की रिकवरी के लिए पेस्ट फिल तकनीक में भी निवेश किया जा रहा है. इसके साथ ही वेंटिलेशन और ग्राउंड कंट्रोल व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान दिया जा रहा है.
भविष्य में भूमिगत खदानों में 5जी नेटवर्क, डिजिटल ट्विन और स्वायत्त निगरानी रोवर जैसी तकनीकों के इस्तेमाल की तैयारी है. इससे खदानों की निगरानी और संचालन को अधिक डेटा आधारित बनाने की दिशा में मदद मिलने की उम्मीद है.
92 एफएमसी परियोजनाओं में 46 चालू
कोयला निकासी और डिस्पैच को अधिक व्यवस्थित करने के लिए फर्स्ट माइल कनेक्टिविटी (एफएमसी) परियोजनाओं पर भी जोर दिया जा रहा है. कोल इंडिया की 92 नियोजित एफएमसी परियोजनाओं में से 46 परियोजनाएं चालू हो चुकी हैं. इन परियोजनाओं से करीब 432 मिलियन टन सालाना क्षमता विकसित हुई है.
करीब 27,800 करोड़ रुपये की इस योजना का लक्ष्य वित्त वर्ष 2029-30 तक 994 मिलियन टन सालाना यांत्रिक लोडिंग क्षमता हासिल करना है. यांत्रिक लोडिंग से कोयला परिवहन और डिस्पैच की प्रक्रिया को अधिक व्यवस्थित करने का लक्ष्य है.
आरएंडडी के लिए 1,900 करोड़ रुपये का निवेश
कोल इंडिया ने वित्त वर्ष 2030 तक अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं और उत्कृष्टता केंद्रों के लिए 1,900 करोड़ रुपये के निवेश का प्रारूप तैयार किया है. आइआइटी के सहयोग से 5जी, कोयला गैसीकरण, स्वदेशी सौर सेल, बैटरी रीसाइक्लिंग और ड्राइ कोल बेनिफिकेशन जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है.
कंपनी का लक्ष्य आने वाले वर्षों में स्वचालित, डेटा आधारित, सुरक्षित और कम कार्बन उत्सर्जन वाले खनन तंत्र को विकसित करना है. तकनीकी बदलावों के साथ उत्पादन क्षमता बढ़ाने और खनन संचालन को अधिक सुरक्षित एवं दक्ष बनाने पर जोर दिया जा रहा है.
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