कोयला कामगारों के पेंशन फंड पर संकट: 240 करोड़ के सालाना घाटे में डूबा CMPFO

CMPFO Pension Fund: कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) के पेंशन फंड की डगमगाती स्थिति ने केंद्र सरकार और कोयला कामगारों की चिंता बढ़ा दी है. सालाना 240 करोड़ रुपये के घाटे के बीच, सीएमपीएफओ आयुक्त ने पब्लिक अकाउंट में जमा 15,424 करोड़ रुपये के उपयोग की अनुमति मांगी है. घटते कामगार और बढ़ते पेंशनभोगियों के असंतुलन को पाटने के लिए संपत्तियों को बेचने और नई पेंशन प्रणालियों पर विचार किया जा रहा है.

CMPFO Pension Fund, धनबाद (मनोज सिंह की रिपोर्ट): कोयला खान भविष्य निधि संगठन (CMPFO) के पेंशन फंड की वित्तीय स्थिति वर्तमान में अत्यंत चिंताजनक बनी हुई है. सरकारी रिपोर्टों और विशेषज्ञों के विश्लेषण के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था के तहत यह फंड लंबे समय तक टिकने की स्थिति में नहीं है. मुख्य समस्या यह है कि कोयला खदानों में नियमित कामगारों की संख्या लगातार घट रही है, जिससे फंड में आने वाला अंशदान कम हो गया है, जबकि पेंशनभोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है. वर्तमान में यह पेंशन फंड सालाना 240 करोड़ रुपये के घाटे का सामना कर रहा है.

अंशदान बढ़ा, लेकिन संकट बरकरार

अक्टूबर 2017 तक कोयला कंपनियां मजदूरी का मात्र 1.16 फीसदी पेंशन फंड में देती थीं, जिसे बढ़ाकर अब 7 फीसदी कर दिया गया है. इसके बावजूद फंड की स्थिरता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है. इस अंतर को पाटने के लिए सीएमपीएफओ आयुक्त ने सरकार से पब्लिक अकाउंट (पीएल) में जमा 15,424.01 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग करने की अनुमति मांगी है. साथ ही, सरकार द्वारा प्रति कर्मचारी दिये जाने वाले 26.72 रुपये के योगदान को बढ़ाकर कर्मचारी पेंशन योजना के बराबर करने का प्रस्ताव भी दिया गया है.

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संपत्तियों की बिक्री और NPS पर विचार

फंड को संकट से उबारने के लिए सीएमपीएफओ की उन अनुपयोगी जमीनों और संपत्तियों को बेचने या किराए पर देने का सुझाव दिया गया है जो वर्तमान में किसी काम नहीं आ रही हैं. इसके अलावा, नए कर्मचारियों के लिए ‘एकीकृत पेंशन योजना’ या ‘राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली’ (NPS) को अपनाने की संभावनाओं को भी तलाशा जा रहा है. सीएमपीएफओ ने कोयला कंपनियों से एकमुश्त वित्तीय सहायता की भी अपील की है.

मजदूर संगठनों की दो टूक: नहीं हो कटौती

इधर, प्रस्तावित बदलावों और फंड की कमी पर मजदूर संगठनों ने कड़ा रुख अपनाया है. यूनियनों का कहना है कि कोयला खदानों में काम करना चुनौतीपूर्ण और जानलेवा होता है, इसलिए श्रमिकों के मौजूदा पेंशन लाभों में किसी भी प्रकार की कटौती स्वीकार नहीं की जाएगी. संगठनों ने साफ किया है कि सरकार को फंड की स्थिरता के वैकल्पिक रास्ते खोजने चाहिए, न कि कर्मचारियों के हितों पर प्रहार करना चाहिए.

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Published by: Sameer Oraon

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