टाटा डीएवी सिजुआ में रविवार को क्षमता संवर्धन कार्यक्रम (कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम) का आयोजन किया गया. कार्यक्रम का उद्देश्य शिक्षकों की व्यावसायिक दक्षता बढ़ाना था. इसमें राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या की रूपरेखा (एनसीएफ)-2023 में हुए परिवर्तनों के साथ-साथ मूल्यांकन में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा की गई. आयोजित सेमिनार में विद्यालय के काफी शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए थे.
कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्यालय की प्रचार्या चंद्रानी बनर्जी ने की. उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 और एनसीएफ-2023 में हुए संरचनात्मक एवं कार्यात्मक परिवर्तनों पर विस्तार से प्रकाश डाला. उन्होंने शिक्षा के 5+3+3+4 ढांचे, त्रिभाषा सूत्र तथा कक्षा दसवीं व बारहवीं की बोर्ड परीक्षाओं में प्रस्तावित बदलावों की जानकारी दी.
उन्होंने बताया कि नई शिक्षा नीति रटंत विद्या के स्थान पर योग्यता आधारित एवं परिणाम-केंद्रित शिक्षा पर जोर देती है. जबकि अमित कुमार ने मूल्यांकन में सुधार विषय पर अपने विचार साझा किये. उन्होंने स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद भारतीय शिक्षा प्रणाली में मूल्यांकन के विभिन्न स्वरूपों की ऐतिहासिक यात्रा बताई.
राधाकृष्णन आयोग, मुदालियर आयोग और कोठारी आयोग की सिफारिशों से लेकर सतत एवं व्यापक मूल्यांकन (सीसीई) और वर्तमान योग्यता आधारित मूल्यांकन तक की पूरी प्रक्रिया को उन्होंने सरल ढंग से समझाया. उन्होंने कहा कि विद्यार्थी मूल्यांकन का मूल उद्देश्य केवल परिणाम देना नहीं, बल्कि शिक्षण की प्रभावशीलता का आकलन कर छात्रों के सीखने और विकास को बढ़ावा देना है.
