धनबाद. कोयलांचल की प्रमुख कंपनी भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) और झारखंड खनिज क्षेत्र विकास प्राधिकार (जमाडा) के बीच कोयले की बिक्री पर लगने वाली बाजार फीस को लेकर विवाद गहरा गया है. बीसीसीएल ने 22 अगस्त 2026 से जमाडा को बाजार फीस का भुगतान बंद कर दिया है. कंपनी ने अपने फैसले के लिए वर्ष 2026 में खनिज और खनिज क्षेत्र से जुड़े कानून यानी एमएमडीआर एक्ट में हुए संशोधन और उस पर प्राप्त विधिक राय का हवाला दिया है.
बीसीसीएल अब तक कोयले की बिक्री पर एक प्रतिशत बाजार फीस के रूप में जमाडा को सालाना करीब 110 करोड़ रुपये का भुगतान करता रहा है. भुगतान बंद होने से प्राधिकार के राजस्व पर बड़ा वित्तीय असर पड़ने की आशंका है. हालांकि, शुल्क की वैधानिक देयता को लेकर दोनों पक्षों की कानूनी व्याख्या अलग-अलग है और अंतिम स्थिति आगे होने वाली कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी.
बीसीसीएल ने विधिक राय को बनाया आधार
जमाडा को भेजे पत्र में बीसीसीएल ने कहा है कि एमएमडीआर एक्ट में वर्ष 2026 में हुए संशोधन के बाद कंपनी ने इस संबंध में विधिक राय ली. प्राप्त राय के आधार पर कंपनी का मानना है कि अब बाजार फीस का भुगतान उसके लिए देय नहीं है. इसी आधार पर 22 अगस्त से भुगतान बंद करने की जानकारी जमाडा को दी गयी है.
बीसीसीएल के इस निर्णय से जमाडा के सामने सालाना करीब 110 करोड़ रुपये के राजस्व का सवाल खड़ा हो गया है. यह राशि लंबे समय से कोयला बिक्री पर बाजार फीस के रूप में प्राधिकार को मिलती रही है.
जमाडा ने बीसीसीएल की व्याख्या से जतायी असहमति
जमाडा का तर्क बीसीसीएल से अलग है. प्राधिकार के अनुसार एमएमडीआर एक्ट में खनन और खनिजयुक्त भूमि से संबंधित प्रावधान हैं, जबकि जमाडा द्वारा वसूली जाने वाली बाजार फीस कोयले की बिक्री पर निर्धारित एक प्रतिशत शुल्क है. इसलिए इसे सीधे खनन या खनिज संबंधी कर की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता.
जमाडा के इसी तर्क के कारण बाजार फीस की वैधानिकता को लेकर विवाद अब कानूनी पेच में फंस गया है. एक ओर बीसीसीएल ने कानून में संशोधन और विधिक राय के आधार पर भुगतान बंद किया है, वहीं जमाडा शुल्क को अलग प्रकृति का बताते हुए उसकी देयता कायम मान रहा है.
सरकार को दी गयी जानकारी, कानूनी सलाह लेगा जमाडा
बीसीसीएल का पत्र मिलने के बाद जमाडा ने पूरे मामले से राज्य सरकार को सूचनार्थ अवगत कराया है. प्राधिकार अब इस मामले में कानूनी सलाह लेने की तैयारी में है. कानूनी राय मिलने के बाद ही यह तय किया जायेगा कि बीसीसीएल के फैसले के खिलाफ किस स्तर पर और किस प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जाये.
जमाडा के एमडी प्रेम कुमार तिवारी ने कहा कि बीसीसीएल ने विधिक राय के आधार पर बाजार फीस का भुगतान नहीं करने की बात कही है. इस संबंध में सरकार को सूचनार्थ पत्र भेज दिया गया है. अब कानूनी सलाह ली जायेगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी.
110 करोड़ के राजस्व पर टिकी नजर
बीसीसीएल के भुगतान रोकने का असर केवल एक शुल्क की वसूली तक सीमित नहीं है. सालाना करीब 110 करोड़ रुपये की बाजार फीस जमाडा के राजस्व का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ऐसे में भुगतान जारी नहीं रहने पर प्राधिकार की आय प्रभावित हो सकती है.
फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने कानूनी आधार के साथ मामले को देख रहे हैं. सरकार को दी गयी सूचना और प्रस्तावित कानूनी सलाह के बाद ही विवाद के अगले चरण की तस्वीर साफ होगी. बाजार फीस की देयता को लेकर अंतिम स्थिति संबंधित कानूनी प्रावधानों और सक्षम स्तर पर लिये जाने वाले निर्णय पर निर्भर करेगी.
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