Dhanbad News: लेबर कोड पर मंथन के लिए एपेक्स जेसीसी की बैठक पांच को

औद्योगिक संबंध, यूनियन मान्यता और वेतन समझौते जैसे मुद्दों पर हो सकती है अहम चर्चा

कोल इंडिया लिमिटेड (सीआइएल) में लागू होने जा रहे श्रम संहिताओं (लेबर कोड) के प्रभाव और आगे की कार्ययोजना पर चर्चा के लिए पांच जून को एपेक्स जेसीसी की महत्वपूर्ण बैठक बुलाई गयी है. बैठक शुक्रवार को सुबह 11:30 बजे से सीआईएल मुख्यालय, कोल भवन, न्यू टाउन, कोलकाता में आयोजित होगी. बैठक की सूचना सीआईएल के कार्यकारी निदेशक (एचआर) गौतम बनर्जी ने जारी की है. जारी सूचना के अनुसार बैठक का मुख्य एजेंडा लेबर कोड्स के सीआइएल पर पड़ने वाले प्रभावों तथा प्रस्तावित एक्शन प्लान पर विचार-विमर्श करना है. माना जा रहा है कि बैठक में श्रम संहिताओं के लागू होने के बाद औद्योगिक संबंधों की नयी व्यवस्था, यूनियन मान्यता, वेतन समझौता, कर्मचारियों के प्रतिनिधित्व और अन्य श्रमिक हितों से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा हो सकती है.

लेबर कोड को लेकर कोल इंडिया में पहले से ही हलचल बनी हुई है. सीआईएल के निदेशक (एचआर) विनय रंजन ने 18 मई 2026 को सभी सहायक कंपनियों को पत्र जारी कर लेबर कोड लागू करने की दिशा में तैयारी शुरू करने का आग्रह किया था. इस पत्र के सामने आते ही एचएमएस के राष्ट्रीय महासचिव हरभजन सिंह सिद्धू ने कड़ी प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने सवाल उठाया था कि यूनियनों से चर्चा किए बिना प्रबंधन ने ऐसा पत्र क्यों जारी किया. साथ ही उन्होंने इस मामले को कोयला मंत्रालय के समक्ष उठाने की बात भी कही थी. ऐसे माहौल में बुलाई गयी एपेक्स जेसीसी की बैठक को कोल इंडिया की भविष्य की औद्योगिक संरचना और श्रमिक संगठनों की भूमिका के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

क्या है एपेक्स जेसीसी

एपेक्स जेसीसी यानी एपेक्स जॉइंट कंसल्टेटिव कमिटी, कोल इंडिया की शीर्ष स्तर की संयुक्त सलाहकार समिति है. इसकी बैठक सामान्यतः सीआईएल चेयरमैन की अध्यक्षता में होती है. बैठक में सीआईएल के निदेशक (एचआर), निदेशक (तकनीक), निदेशक (मार्केटिंग एंड सेल्स), कार्यकारी निदेशक (एचआर), सभी सहायक कंपनियों के सीएमडी, केंद्रीय ट्रेड यूनियनों बीएमएस, एचएमएस, एटक, सीटू से जुड़े कोल फेडरेशनों के वरिष्ठ नेता तथा सीएमओएआई के प्रतिनिधि शामिल होते हैं.

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By Ashok kumar

आशीष कुमार प्रिंट माध्यम में 16 और डिजिटल माध्यम में पिछले 5 वर्षों से पत्रकारिता में एक्टिव हैं. सामाजिक सरोकार, शिक्षा, अनुसंधान, राजनीति, कला-संस्कृति व सिनेमा में रुचि रखते हैं.

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