करीब 12 वर्षों से इंडोर सेवा के अभाव में सिर्फ ओपीडी सेंटर बनकर रह गया एसएसएलएनटी अस्पताल अब फिर से अपने पुराने गौरव की ओर लौटने की तैयारी में है. वर्ष 2014 से बंद पड़ी इनडोर पेशेंट डिपार्टमेंट (आइपीडी) सेवा को दोबारा शुरू करने की पहल की जा रही है. हाल ही में जिला स्वास्थ्य समिति की हुई बैठक में अस्पताल के जर्जर भवन, खराब शौचालय, पेयजल और बिजली व्यवस्था की मरम्मत के लिए जिला खनिज फाउंडेशन ट्रस्ट (डीएमएफटी) मद से फंड उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. वहीं अस्पताल में आधारभूत संरचनाओं को मजबूत कर चरणबद्ध तरीके से बंद पड़ी स्वास्थ्य सेवाओं को फिर शुरू करने की योजना बनायी गयी है. अस्पताल के नवीनीकरण के बाद यहां फिर से मरीजों को भर्ती कर इलाज की सुविधा मिलेगी. स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार आइपीडी सेवा शुरू होने से न सिर्फ मरीजों की परेशानियां कम होंगी, बल्कि सदर अस्पताल और एसएनएमएमसीएच पर बढ़ते मरीजों के दबाव को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
एक दशक से अधिक समय से बंद है भर्ती सुविधा
कभी शहर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में शामिल एसएसएलएनटी अस्पताल में महिला एवं प्रसूति सेवाओं के साथ भर्ती मरीजों के इलाज की समुचित व्यवस्था थी. अस्पताल में कई वार्ड, बेड और विशेषज्ञ चिकित्सकों की सुविधा उपलब्ध थी. लेकिन समय के साथ भवन की स्थिति लगातार खराब होती चली गयी. वार्डों की छतों में दरारें पड़ने लगीं, बारिश के दौरान पानी रिसने लगा और कई हिस्से असुरक्षित घोषित होने की स्थिति में पहुंच गए. बिजली व्यवस्था भी बार-बार बाधित होने लगी. शौचालयों की दुर्दशा और पेयजल संकट ने मरीजों व स्वास्थ्यकर्मियों की मुश्किलें बढ़ा दीं. ऐसे में मरीजों की सुरक्षा को देखते हुए भर्ती सेवाओं को पहले सीमित किया गया और बाद में वर्ष 2014 में पूरी तरह बंद कर दिया गया.
इंडोर सेवा नहीं होने के कारण मरीजों को किया जाता था रेफर
आइपीडी सेवा बंद होने के बाद अस्पताल में केवल ओपीडी सेवाएं संचालित होती रहीं. प्रतिदिन सैकड़ों मरीज यहां इलाज के लिए पहुंचते है,. लेकिन गंभीर मरीजों को सदर अस्पताल, एसएनएमएमसीएच में भेजा जाता है.गर्भवती महिलाओं को होती है सबसे अधिक परेशानी
अस्पताल में भर्ती लेने की सुविधा बंद होने का सबसे अधिक असर महिलाओं पर पड़ा. वर्तमान में प्रसव या सर्जरी की आवश्यकता होने पर महिलाओं को दूसरे अस्पतालों का रुख करना पड़ता है. कई बार दूरी, भीड़ और संसाधनों की कमी के कारण मरीजों व उनके परिजनों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.डीएमएफटी फंड से बदलेगी अस्पताल की तस्वीर
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार डीएमएफटी फंड मिलने के बाद अस्पताल परिसर में व्यापक स्तर पर मरम्मत और विकास कार्य किए जाएंगे. इसके तहत भवन की संरचनात्मक मरम्मत, वार्डों का नवीनीकरण, बिजली व्यवस्था को दुरुस्त करना, नयी पेयजल व्यवस्था विकसित करना तथा शौचालयों का आधुनिकीकरण शामिल है. अस्पताल परिसर को मरीजों के अनुकूल बनाने के लिए सफाई, प्रकाश व्यवस्था और अन्य सुविधाओं पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा. वार्डों को भी पुनः तैयार किया जाएगा.एसएनएमएमसीएच और सदर अस्पताल पर भी घटेगा बोझ
धनबाद के सरकारी स्वास्थ्य तंत्र में वर्तमान समय में अधिकांश गंभीर मरीजों का दबाव एसएनएमएमसीएच और सदर अस्पताल पर है. एसएसएलएनटी अस्पताल में आइपीडी सेवा शुरू होने से मरीजों का भार तीनों अस्पतालों में बंट सकेगा. इससे इलाज की गुणवत्ता में भी सुधार होगा.
