2012-13 में प्लांट एक्सटेंशन के नाम पर खर्च किये गये थे 1.64 करोड़
एनडीडीबी के टेक ओवर में फंसा पेंच
लाखों के बूथ पार्लर हो गये बेकार
धनबाद :भूदा स्थित सरकारी डेयरी बंदी के कगार पर पहुंच गया है. पांच हजार प्रोडक्शन करनेवाला प्लांट अब दूध कलेक्शन सेंटर बन गया है. पिछले आठ सालों से यहां प्रोडक्शन बंद है. लेकिन आज भी यहां दूध का कलेक्शन हो रहा है. यहां 80 लीटर दूध का प्रतिदिन कलेक्शन होता है. सप्ताह-दस दिनों में जो कलेक्शन होता है, उसे पैकेजिंग के लिए रांची भेजा जाता है.
एक जुलाई 2018 को एनडीडीबी (नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड) को टेक ओवर करना था लेकिन विभागीय पेंच में आज तक मामला लटका हुआ है. माह में लगभग 2400 लीटर दूध का कलेक्शन होता है. दूध को शीतल करने में दस हजार का बिल आता है. इसके अलावा स्टाफ पेमेंट व मेंटेनेंस में भी माह में हजारों रुपये खर्च होते हैं.
2008 में हुआ धनबाद डेयरी का उद्घाटन : तत्कालीन मुख्यमंत्री शिबू सोरेन के हाथों 2008 में धनबाद डेयरी का उद्घाटन हुआ. पांच हजार लीटर क्षमता का प्लांट था. 2012-13 में प्लांट के एक्सटेंशन पर लगभग डेढ़ करोड़ खर्च किये. लाखों रुपये खर्च कर दर्जनों पार्लर भी खोले गये, लेकिन एक दिन भी प्लांट नहीं चला.
एक जुलाई को एनडीडीबी को करना था टेक ओवर : एक जुलाई को एनडीडीबी को टेक ओवर करना था. लेकिन विभागीय पेंच में मामला फंसता गया. एनडीडीबी के पदाधिकारी आये और प्लांट से संबंधित दस्तावेज व कुछ तकनीकी सामग्री की लिस्ट दी. लेकिन आज तक विभागीय पदाधिकारियों द्वारा एनडीडीबी को लिस्ट उपलब्ध नहीं करायी गयी.
रांची से मार्केटिंग करता है एनडीडीबी : धनबाद डेयरी को अब तक एनडीडीबी ने टेक ओवर नहीं किया. लेकिन धनबाद में एनडीडीबी मार्केटिंग कर रहा है. धनबाद में प्रतिदिन लगभग छह हजार लीटर मेधा दूध बेच रहा है. इसके अलावा दही व पनीर भी मेधा का यहां आ रहा है.
