नगर निगम : नगर आयुक्त व मेयर पर मानसिक प्रताड़ना व अपशब्द बोलने का आरोप
मुख्यमंत्री, नगर विकास सचिव, श्रम नियोजन विभाग को भेजी त्यागपत्र की प्रति
धनबाद :नगर निगम के 70 वार्ड स्वयं सेवकों ने बुधवार को सामूहिक रूप से इस्तीफा दिया. उन्होंने नगर आयुक्त व मेयर पर मानसिक प्रताड़ना व अपशब्द बोलने का आरोप लगाया है. सामूहिक इस्तीफा देने के पूर्व खड़ेश्वरी मंदिर के पास आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वार्ड सेवकों ने कहा कि सात नवंबर 2011 को 150 वार्ड सेवकों की बहाली ली गयी.
राजस्व का काम सौंपा गया. प्राइवेट कंपनी ने ढाई सालों तक राजस्व की हेराफेरी, कमीशनखोरी व लूट-खसोट से निगम को राजस्व का नुकसान किया. वार्ड सेवकों ने मेहनत व ईमानदारी के साथ निगम की छवि को साफ सुथरी बनायी. लेकिन निगम प्रशासन की ओर से हमलोगों पर दवाब बनाया जाने लगा.
150 में 80 वार्ड सेवकों को मानसिक रूप से प्रताड़ित कर किसी न किसी बहाने पहले ही निकाल दिया गया. हमलोगों से आठ की जगह 12 घंटे काम लिया जा रहा था. सरकारी छुट्टी के दिन भी हमलोगों को बुलाया जाता था और काम लिया जाता था. 26 दिन का मानदेय मिलता था और 30 दिनों तक काम लिया जाता था. नगर आयुक्त व मेयर के उदासीन रवैये के कारण हमलोगों को त्याग पत्र देना पड़ रहा है.
इन कारणों से दिया त्याग पत्र : रेवन्यू रशीद के लिए पेपर नहीं मिलना, आठ की जगह बारह घंटे काम लेना, छुट्टी के दिन भी काम लेना और दैनिक मजदूरी नहीं देना, गलत तरीके से सैफ फॉर्म भरवाने का फरमान जारी करना, प्रतिदिन मीटिंग कर मानसिक रूप से प्रताड़ित करना और आठ से दस वार्ड सेवकों को नौकरी से निकालना, समय पर वेतन का भुगतान नहीं करना, तीन माह का वेतन बकाया रखना, महंगाई भत्ते में किसी प्रकार का वृद्धि न करना, पूरे माह में एक दिन भी छुट्टी न देना, छुट्टी मांगने पर अभद्र व्यवहार करना, पीएफ एकाउंट खोलकर उसमें पैसा जमा नहीं करना, मूलभूत संसाधनों की कमी, वार्ड सेवकों को बैठने के लिए कार्यालय में जगह नहीं, नागरिकों का चेक बाउंस होने पर वार्ड स्वयं सेवकों पर कार्य से निष्कासित करना एवं एफआइआर करवाना.
