सड़क चौड़ी हो रही पर फुटपाथ का नहीं ध्यान, जगह-जगह अवैध पार्किंग से परेशानी
धनबाद : धनबाद शहर में दर्जनों मुख्य सड़कें हैं. इन पर गाड़ियों का भारी दबाव है. कई सड़कों पर अभी तक फुटपाथ नहीं बनाया गया है और जिन सड़कों के बगल में फुटपाथ बनाया गया है वह पैदल चलने के लायक नहीं है. इसके अलावा जगह-जगह अवैध पार्किंग राहगीरों का रास्ता रोक लेती हैं. ऐसे में पैदल चलने वाले लोग जिला प्रशासन के अधिकारियों से पूछते हैं, कि किधर से चलें साहब? लेकिन इसका जवाब देने वाला कोई नहीं है.
सड़क चौड़ीकरण में भी फुटपाथ का ख्याल नहीं रखा गया है. शहर की प्राय: सड़कें चौड़ी हुई हैं, लेकिन फुटपाथ नहीं. पैदल चलने वाला आदमी डर-डर कर कदम बढ़ाता है कि न जाने कौन तेज रफ्तार बाइक, कार उसकी हड्डियां न तोड़ दे. शहर को जाम से बचाने के लिए ही नगर निगम ने पार्किंग की नीलामी नहीं करायी. लेकिन उसका कोई लाभ लोगों को नहीं मिला, क्योंकि अवैध पार्किंग के चलते समस्या जस की तस है.
सिटी सेंटर से मेमको मोड़
सिटी सेंटर से मेमको मोड़ की सड़कें बहुत व्यस्त रहती हैं. इस मार्ग की बायीं तरफ बस स्टैंड है और दायीं तरफ हाउसिंग कॉलोनी व कई दूसरी कॉलोनियां. यहां 24 घंटे गाड़ियां चलती हैं, लेकिन 24 घंटे लोग पैदल नहीं चल सकते. क्योंकि सड़क तो चौड़ी है, लेकिन फुटपाथ की अच्छी व्यवस्था नहीं है. आये दिन इस सड़क पर हादसे में लोगों की मौत होते रहती है.
कहीं ऊंचा तो कहीं नीचा है फुटपाथ
ओवरब्रिज पर बैंक मोड़ बिरसा मुंडा चौक से लेकर नया बाजार सुभाष चौक तक पैदल चलना परेशानी का सबब बन चुका है. बिरसा चौक से नया बाजार जाने वाली सड़क की बांयीं तरफ फुटपाथ बना है, लेकिन इस पर चढ़ना आसान नहीं है. यह बहुत ऊंचा है और कई जगह टूटा है. थोड़ी सी असावधानी हुई तो आदमी सीधे नीचे गिर जायेगा. दूसरी ओर सुभाष चौक से बिरसा चौक तक ओवरब्रिज पर फुटपाथ की चौड़ाई बहुत कम है. जैसे ही जाम लगता है वैसे ही इस पर बाइक चलनी शुरू हो जाती है. राहगीर जाये तो किधर?
सड़क पर सजा है कारोबार
रणधीर वर्मा चौक से लेकर आइएसएम गेट तक सड़क पर कारोबार फैला हुआ है. रणधीर वर्मा चौक से जैसे ही आइएसएम गेट की तरफ बढ़ेंगे तो उस तरफ न तो फुटपाथ है और न ही सड़क पर पैदल चलने का स्थान, दोनों तरफ फूल और फल की दुकानें लगी हैं. बड़ी-बड़ी गाड़ियां सड़क पर रूक कर खरीदारी करती हैं. वहीं पुलिस लाइन के पास सब्जी का बाजार सड़क पर लगता है और इस स्थान पर प्रतिदिन पैदल चलने वाले लोग गाड़ियों के धक्के खाते हैं.
