शहर के सीसीटीवी खंगाले, वाहन स्टैंडों की खाक छानी
न फुटेज मिले न स्कूटी
धनबाद : लुबी सर्कुलर रोड में यूको बैंक के पीछे स्थित कोल कारोबारी आलोक जैन के घर डकैती के दूसरे दिन गुरुवार को भी पुलिस के हाथ कोई सुराग नहीं लगा है. पुलिस ने शहर के सभी चौक-चौराहों पर लगे सीसीटीवी कैमरे के फुटेज खंगाले हैं. इसके अलावा पुलिस ने कोल कारोबारी के घर में काम कर रहे मिस्त्रियों से भी घंटों पूछताछ की. पुलिस को श्री जैन की उस स्कूटी का पता भी नहीं चला जिस पर बैठ कर दो डकैत भागे थे. इसके लिए पुलिस ने बरटांड़ बस स्टैंड, स्टेशन रोड, झरिया, कतरास, गोविंदपुर आदि इलाकों में तलाशी अभियान चलाया है.
टावर डंप का सहारा : फोन के जरिये सुराग के लिए घटनास्थल के आस-पास टावर डंप का सहारा पुलिस ले रही है. पुलिस के पास इसकी रिपोर्ट भी आ गयी है. संदिग्ध नंबरों की जांच की जा रही है. धनबाद थानेदार नवीन राय ने बताया कि अपराधियों का जल्द स्केच भी बना लिया जायेगा.
चारपहिया से भागे डकैत : छानबीन में पता चला है कि डकैतों ने भागने के लिए चार पहिया वाहन का इस्तेमाल किया है. पुलिस को सेलिब्रेशन रेस्टोरेंट के सीसीटीवी में यह दिखा है. हालांकि अंधेरा होने की वजह से यह साफ नहीं हो पाया कि गाड़ी किस कंपनी की है. दो अपराधियों के स्कूटी से जाने के बाद पांच अपराधी चार पहिया वाहन से भागे हैं, ऐसा पुलिस का मानना है.
घर में घुसे कैसे, पुलिस के लिए यही पहेली : पुलिस का कहना है कि आखिर डकैतों ने घर में प्रवेश कैसे किया, यह उसकी समझ में नहीं आ रहा है. आलोक जैन व उनके परिवार के अनुसार डकैत पीछे से बांस के सहारे पहले छत पर और फिर खिड़की काट कर घर में घुसे. मगर पुलिस का कहना है कि उधर से छत पर चढ़ने का कोई साक्ष्य नहीं मिला है. पुलिस के अनुसार डकैत मेन गेट से परिसर में प्रवेश कर सकते हैं. उसके बाद उन लोगों ने पहले सर्वेंट क्वार्टर में सो रहे गार्ड व नौकर पर हमला किया. उसके बाद खिड़की को काटी है.
डकैतों को थी घर की पूरी जानकारी : पुलिस ने बताया कि पीड़ित पक्ष के दिये गये बयान के अनुसार यह बात साफ हो गयी है कि डकैतों को घर की पूरी जानकारी थी. घर में कितने परिवार के आदमी हैं, कितने नौकर हैं, हथियार है कि नहीं, इस बात की जानकारी डकैतों को पहले से थी. बताया कि डकैतों ने घर में घुस कर सबसे पहले पिस्टल की मांग की थी. मगर घर वालों ने बताया कि पिस्टल स्व. राजकुमार जैन के नाम पर था. उनकी मौत के बाद पिस्टल जमा कर दी गयी तो वे लोग शांत हुए. हालांकि पिस्टल खोजने की कोशिश भी डकैतों के द्वारा की गयी.
