भौंरा : भौंरा के गौरखूंटी स्थित तपन आचार्या के आवास पर शनिवार को विमल चंद्र आचार्या व विष्णुपदो मुखर्जी का 37वां शहादत दिवस मनाया गया. मुख्य अतिथि पूर्व मंत्री मन्नान मल्लिक, पूर्व सांसद चंद्रशेखर दुबे उर्फ ददई दुबे व वरीय पत्रकार डॉ रवींद्र कुमार सिंह थे.
श्री मल्लिक ने कहा कि कांग्रेसी देशहित में शहीद होने के लिए सदा तैयार रहते हैं. दोनों बहादुरों ने कोयला खदान की हड़ताल को रोकने का बीड़ा उठाया था, लेकिन सिरफिरों ने 1982 में उनकी निर्मम हत्या कर दी. भौंरा ओपी के तत्कालीन प्रभारी कन्हैया उपाध्याय ने इस हत्या कांड के पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेजा था.
शहीद के भाई तपन आचार्या ने कहा कि शहीदों व उनके परिवार को जो सम्मान मिलना चाहिए था, आज तक नहीं मिला. आज तक सरकार ने उन्हें शहीद का दर्जा नहीं दिया. ददई दुबे ने कहा कि तपन आचार्या के प्रयास से आज सभी कांग्रेसी एक मंच पर जुटे हैं. वह दोनों शहीद का मामला धनबाद से संसद भवन तक उठायेंगे.
वक्ताओं में बृजेंद्र प्रसाद सिंह, वैभव सिन्हा, संतोष सिंह, मुख्तार खान, किशोर कुमार, समाजसेवी मौसम महांति, भगवान दास, विजय सिंह, विजय गुप्ता, शमशेर आलम, रंजीत सिंह (कक्कू), एसके शाही, नुनूलाल पासवान, निरंजन कालिंदी, उमेश यादव आदि मौजूद थे.
क्या था पति का कसूर : विमल आचार्या
आज विमल चंद्र आचार्या की पत्नी शेफाली आचार्या की आंखें नम थीं. उनकी गमगीन आखें बार-बार कह रही थीं कि आखिर उनके पति का क्या कसूर था. उनके बच्चे अनाथ हो गये.
37 वर्षों से वह विधवा का अभिशप्त जीवन जीने को मजबूर हैं. उनके पति इंदिरा गांधी के आह्वान पर खदानों में हड़ताल रोकने का काम कर रहे थे. अपना कोई निजी काम नहीं था. 37 वर्षों में कांग्रेस सरकार व उसके नेताओं ने क्या क्या.
