धनबाद : कोयलांचल में रहनेवाले केरलवासी जनवरी आते ही केरला को काफी मिस करने लगते हैं, क्योंकि केरल में चौदह जनवरी को संक्रांति की धूम मचती है. अयप्पा स्वामी की पूजा अर्चना के बाद सभी सामूहिक रूप से पारंपरिक भोजन ग्रहण करते हैं. संध्या में दिवा आरती होती है.
14 जनवरी को मनेगी संक्रांति : जगजीवन नगर अयप्पा मंदिर में संक्रांति पारंपरिक रूप से मनायी जाती है. अयप्पा टेंपल कमेटी द्वारा पूजा आयोजित की
जाती है. कमेटी के टीआर राजू ने बताया संक्रांति के दिन सुबह चार बजे महा गणपति होम के बाद कलश पूजा प्रारंभ होगी. पारंपरिक पूजा के लिए केरला से पुरोहित को बुलाया गया है. पूजा अर्चना, महाआरती के बाद सभी सामूहिक रूप से पारंपरिक भोजन ग्रहण करेंगे है. 14 जनवरी को संक्रांति् का त्योहार मनाया जायेगा.
26 नवंबर से प्रारंभ होती है पूजा : कमेटी के टी मुरलीघरन बताते हैं केरल में 26 नवंबर से संक्रांति की पूजा (मंडल पूजा) प्रारंभ हो जाती है जो 14 जनवरी को समाप्त होती है. पूजा प्रारंभ होने के बाद सभी ब्रह्मचर्य जीवन का पालन करते हैं. निरामिष भोजन ग्रहण करते हैं. अयप्पा स्वामि की अर्चना कर परिवार की खुशहाली और समृद्धि की कामना करते हैं.
1979 से हो रही है पूजा : अयप्पा स्वामी की पूजा कोयलांचल में 1979 से हो रही है. पहले झरिया नंदावना हॉल में पूजा होती थी. 1981 में जगजीवन नगर में अयप्पा टेंपल बनने के बाद यहां पूजा की जाने लगी. सुबह पूजा प्रारंभ हो जाती है. महाआरती के बाद केरल का पारंपरिक भोजन चावल, अवियल, इंजीकरी, तोरल, पचरी, पायस केले के पत्ते पर प्रसाद के रूप में केरेलियन एवं अन्य लोग ग्रहण करते हैं. संध्या में सजे रथ पर अयप्पा स्वामी को बिठा कर नगर भ्रमण कराया जाता है. मंदिर की सीढ़ियों पर कपूर जलाकर रोशनी कर दिवा आरती की जाती है.
ये हैं कमेटी मेंबर : के विजय कुमार टी मुरलीघरन , टीआर राजू , उन्नी किशन , रविंद्रण नायर राजकुमार पीके प्रसन्ना विजय कुमार, अर्चना मुरलीधरन, लता रविंद्रण, राधा मणि आदि.
बालाजी मंदिर में 15 को मनाया जायेगा पोंगल
दक्षिण भारतीय का पर्व पोंगल 14-16 जनवरी तक मनाया जायेगा़ पोंगल के लिए घरों में विशेष अल्पना बनायी जा रही है. पोंगल के दिन प्रात:स्नान ध्यान कर भगवान सूर्य सहित अन्य देवी-देवताओं की अाराधना की जाती है. घर में बनाये गये विशेष व्यंजन और पोंगल अर्पित किये जाते हैं. इसे भगवान को अर्पित कर लोग प्रसाद ग्रहण करते हैं. एक-दूसरे को पर्व की बधाई देते हैं. यह त्योहार तीन दिनों तक मनाया जायेगा़ तमिल समाज के लोग एक-दूसरे के घरों में जाकर पोंगल की बधाई देंगे़
1985 से बालाजी हो रही है पूजा : बालाजी मंदिर जगजीवन नगर में 1985 से बालाजी महाराज की पूजा अर्चना की जा रही है . यहां सालो भर विशेष पूजन कार्य चलता है. गणेश पूजा और ब्रहोत्स्वम खास होता है. पूजा कराने के लिए तिरूपति से पुरोहित को बुलाया जाता है. भोग बनाने के लिए विशेष कारीगर आते हैं.
ये हैं मेंबर : केबीआर राव, के आरआरसी राव, जीवीएस राव, डीवी नायडू, ईबीआ्र राव,बी सुब्रमण्यम, वीएमएसआर मूर्ति, एस बैंकटेश, गोविंद, वीवीआर राव, जी राकेश, वीवीआर राव, पंडरी राजू, पदमजा, वाणी, ज्योति. एनवीएस, मंजूला नायडू, आदि
