धनबाद : एचआइवी पीड़ित मरीज को ऑपरेशन नहीं करने व स्त्री व प्रसूति रोग विभाग में ओटी (ऑपरेशन थियेटर) से महिला मरीजों को बाहर कर लेने के मामले को राज्य मानवाधिकार आयोग ने गंभीरता से लिया है. आरोपों की जांच करने हजारीबाग से हाई पावर कमेटी की टीम ने पीएमसीएच का निरीक्षण बुधवार को किया.
टीम में मुख्य रूप से आरडीडीइ (हजारीबाग) डॉ आशा एक्का शामिल थी. डॉ एक्का ने इस दौरान हड्डी रोग व स्त्री व प्रसव रोग के इलाज करने वाले चिकित्सक से पूछताछ की. इसके साथ ही अधीक्षक डॉ तुनुल हेंब्रम से कई जानकारी ली. एचआइवी पीड़ित व्यक्ति के इलाज, उनके ऑपरेशन, ऑपरेशन करने में हुई देरी के बारे में जानकारी ली.
हालांकि संबंधित चिकित्सक ने किसी भी तरह के दुर्व्यवहार से इनकार कर दिया. बता दें कि प्रभात खबर ने खबर को प्रमुखता से प्रकाशित किया था. इसके बाद पार्षद निर्मल मुखर्जी ने मानवाधिकार आयोग में शिकायत की थी. आयोग के निर्देश पर टीम पहुंची.
आरडीडीइ पहुंची पीएमसीएच
- 24 अप्रैल 2018 को बगोदर के मरीज को ओटी से कर दिया गया था बाहर
- मुख्यमंत्री जन संवाद में की गयी थी शिकायत, जांच करने पहुंची हाई पावर टीम
क्या बोलीं आरडीडीइ
आरडीडीइ डॉ आशा एक्का ने बताया कि स्त्री व प्रसूति रोग और हड्डी रोग के दो मामलों में आयी थी. चिकित्सकों ने बताया कि पानी की कमी के कारण कुछ आॅपरेशन टालने पड़े थे. दुर्व्यवहार नहीं किया गया था. बाद में ऑपरेशन हुआ था. जांच में अस्पताल में अव्यवस्था सामने आयी है. इसे तत्काल दुरुस्त करने की भी सलाह दी गयी है.
चिकित्सकों ने कहा : दुर्व्यवहार नहीं, पानी की कमी से नहीं हुआ था ऑपरेशन
इलाज करने वाले चिकित्सकों ने आरडीडीइ को सफाई दी. कहा कि पीएमसीएच में अपना चापानल नहीं है. जलापूर्ति के पानी से ही अस्पताल निर्भर रहता है. 24 अप्रैल 2018 को पानी नहीं करने के कारण महिलाओं का ऑपरेशन नहीं हुआ था.
बगोदर के युवक के टूटे पैर का ऑपरेशन भी इसी दिन था. अस्पताल में पानी नहीं होने के कारण कई ऑपरेशन टाल दिये गये थे. एचआइवी ग्रस्त मरीज के लिए ऑपरेशन के लिए अलग से कीट नहीं था. हालांकि बाद में युवक का ऑपरेशन हुआ था.
