धनबाद : 120 उद्योगों पर छाये बंदी के काले बादल

धनबाद : बाघमारा कोयलांचल में रंगदारी के खिलाफ उद्यमियों की मोर्चाबंदी बरकरार है. मंगलवार को 15वें दिन भी लिंकेज व फॉरवर्ड ऑक्शन से कोयला खरीद करनेवाले व्यवसायियों ने बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल के एक से पांच तक के कोलियरियों क्षेत्रों से कोयला उठाव नहीं किया. इससे बीसीसीएल के साथ हार्डकोक इंडस्ट्रीज को भी करोड़ों का […]

धनबाद : बाघमारा कोयलांचल में रंगदारी के खिलाफ उद्यमियों की मोर्चाबंदी बरकरार है. मंगलवार को 15वें दिन भी लिंकेज व फॉरवर्ड ऑक्शन से कोयला खरीद करनेवाले व्यवसायियों ने बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल के एक से पांच तक के कोलियरियों क्षेत्रों से कोयला उठाव नहीं किया. इससे बीसीसीएल के साथ हार्डकोक इंडस्ट्रीज को भी करोड़ों का नुकसान हो रहा है.
वर्तमान में धनबाद और चिरकुंडा में करीब 120 हार्डकोक भट्ठे संचालित हैं. इनमें 94 लिंकेज व 26 प्राईवेट भट्ठे हैं. इन हार्डकोक इकाइयों पर बंदी के काले बादल मंडरा रहे हैं. इन हार्डकोक इकाइयों में 24,000 से अधिक लोगों का रोजगार मिला हुआ है. दूसरी ओर बाघमारा कोयलांचल के जिन कोलियरी क्षेत्रों से हार्डकोक इकाइयों का कोयला उठाव होता है, वहां कार्यरत हजारों असंगठित मजदूरों के सामने भुखमरी की स्थिति गंभीर होती जा रही है.
पूरे मामले में जिला प्रशासन मूकदर्शक बना हुआ है. हार्डकोक उद्यमी रंगदारी नहीं देने का ऐलान कर चुके हैं. उनका स्पष्ट कहना है कि चाहें उद्योग बंद ही क्यों नहीं करना पड़े, वेलोग रंगदारी नहीं देंगे. मजदूरों की जो मजदूरी होगी, सीधे उनके एकाउंट में ही देंगे. हार्डकोक उद्यमियों के इस फैसले से बाघमारा क्षेत्र में मजदूरों के नाम रंगदारी का खेल उल्टा पड़ता दिख रहा है. हार्डकोक उद्यमियों की एकजुटता ने ‘रंगदारों के सरदार’ को परेशानी में डाल दिया है.
इस बीच खबर है कि ‘रंगदारों के सरदार’ ने पिछले दो-तीन दिनों में दो-चार व्यवसायियों के सामने घुटना टेकते हुए उनका कोयला उठवाया है. ‘रंगदारों का सरदार’ व्यवसायियों में फूट डालने की दिशा में एड़ी चोटी का जोर लगाये हुए है, लेकिन अभी तक सफलता नहीं मिल पायी है. बड़ी बात यह कि असंगठित मजदूरों का भी एक बड़ा तबका हार्डकोक उद्यमियों द्वारा मजदूरों के बैंक एकाउंट में पैसा देने के फैसले के पक्ष में खड़ा हो गया है.
15 दिनों के बाद डीसी ने तोड़ी चुप्पी, कहा – ‘हार्डकोक उद्यमियों ने नहीं की कभी रंगदारी की शिकायत’
धनबाद : रंगदारी के सवाल पर पिछले 15 दिनों से बाघमारा के कोलियरी क्षेत्रों से लिंकेज व फॉरवर्ड ऑक्शन द्वारा कोयला खरीद करनेवाले व्यवसायियों ने कोयला उठाव बंद रखा है. पहली बार हार्डकोक व्यवसायियों के संगठन इंडस्ट्री एंड कॉमर्स एसोसिएशन ने ‘रंगदारों के सरदार’ के सामने घुटने टेकने की बजाय खिलाफ में मोर्चा खोल रखा है.
राजधानी रांची तक इसकी चर्चा है. और धनबाद के उपायुक्त पूरे घटनाक्रम से बेखबर हैं. 15 दिनों के बाद उपायुक्त ने चुप्पी तोड़ी और कहा-‘हार्ड कोक उद्यमियों ने कभी भी कोयला उठाव में रंगदारी मांगे जाने की शिकायत नहीं की.’ मंगलवार को समाहरणालय में पत्रकार सम्मेलन में डीसी ने कहा कि उन्हें मीडिया से ही जानकारी मिली कि व्यवसायियों को धमकी मिल रही है.
आज तक किसी भी उद्योगपति या उनके संगठन की तरफ से किसी तरह की शिकायत नहीं की गयी. चाहे बाघमारा हो या निरसा इससे फर्क नहीं पड़ता. किसी को भी अगर किसी तरह की परेशानी हो रही है, तो पहले उपायुक्त को बतायें. अगर कार्रवाई नहीं होती है, तब ऊपर जायें. लेकिन यहां ऐसा नहीं हुआ. कहा कि व्यापारी समस्या बतायें, उन्हें पूर्ण सुरक्षा दी जायेगी.
एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा‘डीसी को लिखित दी गयी है रंगदारी की जानकारी’
धनबाद :इंडस्ट्रीज एंड कॉमर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएन सिंह ने कहा कि डीसी को मामले की लिखित रूप से शिकायत की गयी है. प्रत्येक दिन अखबारों में जो खबरें आ रही हैं, उनकी कटिंग भी माननीय उपायुक्त महोदय को भेजी जा रही है. धनबाद में कोयला लोडिंग प्रकरण हॉटकेक बना हुआ है.
इसके बावजूद माननीय डीसी साहब कह रहे हैं, उनसे रंगदारी संबंधी कोई शिकायत नहीं की गयी है. डीसी ही नहीं एसएसपी, मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, प्रधानमंत्री को एक-एक दिन की गतिविधि पोस्ट की जा रही है. श्री सिंह ने कहा कि बाघमारा कोयलांचल के कोलियरी क्षेत्रों से 19 नवंबर से लोडिंग बंद है.
18 नवंबर तक बाघमारा कोयलांचल स्थित लोडिंग प्वाइंटों पर प्रतिटन कोयला लोडिंग के नाम पर व्यवसायियों से 650 रुपये की वसूली होती थी. 19 नवंबर से इसे बढ़ाकर 1250 रुपये प्रति टन कर दिया गया. इसके बाद व्यवसायियों ने कोयला उठाव नहीं करने का फैसला किया. बाघमारा क्षेत्र में कोयला लोडिंग के नाम पर कौन रंगदारी वसूली करता है? कोयला उठाव रोकने के पीछे कौन है, यह धनबाद का बच्चा-बच्चा जानता है. अब रंगदारी नहीं चलने दी जायेगी, चाहें इंडस्ट्रीज बंद ही क्यों नहीं करनी पड़े?
डीसी साहब यह भी जान लें, संभव हो तो जांच करा लें
पिछले कुछ वर्षों से बाघमारा कोयलांचल स्थित बीसीसीएल की एक दर्जन से अधिक कोलियरियों पर ‘रंगदारों के सिंडिकेट’ का कब्जा है. यहां से कोयला उठाव के लिए लिंकेज होल्डरों को प्रतिटन 650 रुपये की रंगदारी देनी पड़ती है. यह स्थिति सिर्फ बाघमारा कोयलांचल में ही है.
महेशपुर व खरखरी कोलियरी : लिंकेज होल्डरों से लिये जानेवाले प्रतिटन 650 रुपये में से प्रतिटन 200 रुपये ही लोडिंग मजदूरों को दिये जाते हैं. शेष 450 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
नदखरकी, बेनीडीह व जमुनियां : लिंकेज होल्डरों से लिये जानेवाले प्रतिटन 650 रुपये में से प्रतिटन 230 रुपये ही लोडिंग मजदूरों को दिये जाते हैं. शेष 420 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
शताब्दी, मुराइडीह व फुलारीटांड़ : लिंकेज होल्डरों से लिये जानेवाले प्रतिटन 650 रुपये में से प्रतिटन 250 रुपये लोडिंग मजदूरों को दिये जाते हैं. शेष 400 रुपये रंगदारों के सिंडिकेट को चला जाता है.
चैतुडीह व कनकनी : यहां पे-लोडर से कोयला लोडिंग होती है. बाघमारा की अन्य कोलियरियों की तरह यहां भी उद्यमियों से प्रतिटन 650 रुपये की वसूली होती है. यह पैसा किसकी जेब में जाता है?

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