धनबाद : क्लिनिक इस्टैब्लिशमेंट एक्ट के तहत अर्हता नहीं पूरे करने वाले जिले के निजी अस्पताल, नर्सिंग होम के बंद करने के आदेश पर चिकित्सक समुदाय में भारी उबाल है. जिला प्रशासन व स्वास्थ्य विभाग के पत्र के बाद गुरुवार को आइएमए का एक प्रतिनिधिमंडल सिविल सर्जन डॉ चंद्रांबिका श्रीवास्तव से मिल कर ज्ञापन सौंपा.
नेतृत्व आइएमए व हॉस्पिटल बोर्ड ऑफ इंडिया (अाइएमए) सचिव डॉ सुशील कुमार कर रहे थे. चिकित्सकों का कहना है कि फायर, प्रदूषण के लिए एनओसी की प्रक्रिया काफी जटिल कर दी गयी है. ऐसे में एनओसी नहीं मिल रहा है. मौके पर डॉ बीएन गुप्ता, डॉ विकास हाजरा, डॉ मासूम आलम, डॉ संजीत करण, डॉ (मेजर) चंदन, डॉ विभाष सहाय आदि मौजूद थे.
अत्याधुनिक उपकरण, ए ग्रेड नर्स कहां से लायें? : पत्र में एनओसी के अलावा निजी अस्पतालों में ए ग्रेड नर्स के साथ प्रशिक्षित कर्मियों को रखने की बात कही गयी है. इसके साथ ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम, सेंट्रल ऑक्सिजन सप्लाइ, वूमेन एंड चाइल्ड एग्जामिनेशन रूम, रेफ्टी, लैंड्री, किचेन, वाटर डिस्पेजोल सहित दो दर्जन से अधिक बिंदुओं को पूरा करने को कहा गया है. चिकित्सकों का कहना है कि यह अर्हता काॅरपोरेट अस्पतालों के हैं, छोटे-छोटे अस्पताल इसे कैसे पूरा कर सकते हैं.
निजी अस्पतालों से जुड़े हैं 50 हजार परिवार : आइएमए ने कहा कि निजी अस्पताल, नर्सिंग होम बंद होने से इससे प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रुप से जुड़े लोग बेरोजगार हो जायेंगे. धनबाद में लगभग दस हजार लोग सीधे निजी अस्पतालों से जुड़े हैं. वहीं 40 हजार के आसपास इनके परिवार आदि का भरन-पोषण हो रहा है.
अग्निशमन व प्रदूषण के एनओसी में अटके निजी अस्पताल : अग्निशमन विभाग से एनओसी के लिए पहले जिला से एनओसी लेना पड़ता था. लेकिन अब एनओसी राज्य (मुख्यालय) से लेना होगा. इसके लिए ऑन लाइन आवेदन करना है. भवन का निर्माण आर्किटेक से करा कर नक्शा मुख्यालय को देना है. इसके बाद अग्निशमन विभाग अस्पताल या नर्सिंग होम में कहां-कहां अग्निशमन यंत्र लगाना है, वह निर्देश देंगे. यंत्र लगाने के बाद जिले के पदाधिकारी निरीक्षण कर इसका फोटो मुख्यालय को देंगे.
संतुष्ट होने के बाद ही एनओसी मिल पायेगा. इसी तरह प्रदूषण विभाग से एनओसी लेना भी हो गया है. जबकि धनबाद में सेंट्रल अस्पताल छोड़कर कहीं इंसीनिरेटर नहीं है.
आइएमए की मांग
कॉमन मिनिमम रिक्वायरमेंट तय किये जायें, बेसिक आवश्यकताओं पर ध्यान दिया जाये.
रजिस्ट्रेशन या रिनुअनल के लिए सिंगल विंडो सिस्टम बनाया जाये, जहां से सभी एनओसी मिल पाये.
आइएसबीवाई का बकाया पैसा नर्सिंग होम को सहानुभूति पूर्वक दिया जाये.
मिनिमम रिक्वायरमेंट होने पर छोटे अस्पताल भी आयुष्मान भारत से जुड़ पायेंगे.
