हेडलेस बन कर रह गया है सीएमपीएफ

धनबाद : देश के लगभग नौ लाख 40 हजार कोयला कामगारों की पीएफ और पेंशन की देखरेख करने वाला कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) पिछले 15 महीने से हेडलेस (बिना मुखिया के) बन कर रह गया है. कोयला मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार सीएमपीएफ आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में हैं, जो अगस्त 2017 में सीएमपीएफ […]

धनबाद : देश के लगभग नौ लाख 40 हजार कोयला कामगारों की पीएफ और पेंशन की देखरेख करने वाला कोयला खान भविष्य निधि संगठन (सीएमपीएफओ) पिछले 15 महीने से हेडलेस (बिना मुखिया के) बन कर रह गया है. कोयला मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार सीएमपीएफ आयुक्त के अतिरिक्त प्रभार में हैं, जो अगस्त 2017 में सीएमपीएफ के धनबाद स्थित मुख्यालय में अंतिम बार आये. दूसरी ओर खर्च कटौती की सरकार की घोषणा भी मजाक बन कर रह गयी है. सीएमपीएफ के आयुक्त को बैठाकर (वेटिंग में रखकर), बिना काम के पिछले 15 माह से वेतन का भुगतान किया जा रहा है. मजदूर संगठन सरकार की नीयत पर सवाल उठा रहे हैं.

क्या है मामला : 9 जून 2017 की रात में कोयला मंत्रालय ने सीएमपीएफ आयुक्त बीके पंडा को पद से हटाते हुए वेटिंग में कर दिया. तब से वह बिना काम किये ही वेतन ले रहे हैं. मंत्रालय के आर्थिक सलाहकार अनिमेष भारती को अतिरिक्त प्रभार दिया गया. प्रभार लेने के बाद भारती दिल्ली गये. फिर अगस्त में दो-तीन दिन के लिए आये. फिर जो गये सो दुबारा मुख्यालय नहीं आये हैं. कोलकाता और रांची आते हैं पर मुख्यालय नहीं. बिना आयुक्त काम प्रभावित हो रहा है, ऐसा कुछ अधिकारी और कर्मचारी कहते हैं. आधिकारिक सूत्र बताते हैं कि
अधिकारियों का तबादला नहीं होने से एक रीजनल कमिश्नर पांच-पांच रीजन के प्रभार में हैं. कई जूनियर अधिकारी सीनियर अधिकारी के प्रभारी बने हुए हैं.
बोले यूनियन लीडर
सरकार कहती कुछ है और करती कुछ है. सरकार सीएमपीएफ को बर्बाद करने पर तुली है, ताकि मजदूरों को सामाजिक सुरक्षा का लाभ न मिल सके. कई बार स्थायी आयुक्त नियुक्त करने का मुद्दा उठाया. पर सरकार ध्यान ही नहीं देती.
रमेंद्र कुमार, अध्यक्ष एटक व ट्रस्टी बोर्ड सदस्य
सामाजिक सुरक्षा में कटौती और सीएमपीएफ के घोटालेबाजों को बचाने के लिए स्थायी आयुक्त की नियुक्ति नहीं हो रही है. बीके पंडा ने घोटाला उजागर कर जांच करवा रहे थे, इसलिए कोयला मंत्रालय के तत्कालीन संयुक्त सचिव ने उन्हें पद से हटा दिया. कई बार ट्रस्टी बोर्ड की बैठक में इस मामले को उठाया. तत्काल जांच कर स्थायी कमिश्नर की नियुक्ति होनी चाहिए.
ब्रजेन्द्र कुमार राय, अध्यक्ष एबीकेएमएस
सीएमपीएफ के साढ़े नौ लाख सदस्यों की उपेक्षा हो रही है. हमलोगों ने कई बार इस मुद्दे को उठाया. पर यह सरकार सुनने को तैयार ही नहीं है. कोयला मजदूरों की पीएफ और पेंशन की देखरेख करने वाले संस्था को ‘हेडलेस’ बनाकर रखना , सरकार की एक बड़ी साजिश है.
डीडी रामननंदन, सदस्य ट्रस्टी बोर्ड

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