सेशन कोर्ट ने लोअर कोर्ट का फैसला पलटा
धनबाद : जिला व सत्र न्यायाधीश चौदह आलोक कुमार दुबे की अदालत ने अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी शशि भूषण शर्मा की अदालत के उस फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें ढुलू महतो को एक साल की सजा सुनायी गयी थी. बरोरा में 6 जून 2006 को दरिदा मोड़ के समीप सड़क दुर्घटना में वकील महतो की मौत हो गयी थी. ढुलू पर सड़क जाम कर आवागमन बाधित करने व सरकारी काम में बाधा पहुंचाने का आरोप था. बाघमारा (बरोरा) थाना में कांड संख्या 133/06 दर्ज किया गया था. अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी शशि भूषण शर्मा की अदालत ने ढुलू महतो समेत अन्य को एक साल की सजा सुनायी थी. उक्त निर्णय के खिलाफ ढुलू महतो ने प्रधान जिला व सत्र न्यायाधीश रंजीत कुमार चौधरी की अदालत में 2 अगस्त 18 को क्रिमिनल अपील याचिका 154/18 दायर की थी.
अदालत ने अपील को स्वीकृत कर सुनवाई के लिए जिला व सत्र न्यायाधीश चौदह आलोक कुमार दुबे की अदालत में भेज दी थी. दुबे ने शनिवार को अपील याचिका को एलाउ करते हुए लोअर कोर्ट के निर्णय को निरस्त कर दिया. इस प्रकार ढुलू बरी हो गये. 12 जुलाई 18 को एसडीजेएम कोर्ट ने ढुलू महतो समेत मानिक महतो, संतोष महतो, रावण महतो, धीरेंद्र महतो, सीताराम महतो, विनोद महतो व मनोज महतो को भादवि की धारा 143 में छह माह, 341 में एक माह, 353 में एक वर्ष कैद वहीं 283 में 200 (दो सौ) रुपये जुर्माना की सजा सुनायी थी. फिलहाल इनमें से केवल ढुलू महतो ने ही अपील याचिका दायर की थी. ढुलू महतो की ओर से अधिवक्ता ललन किशोर प्रसाद भी अदालत में मौजूद थे.
वारंटी भगाने के मामले में गवाही : वारंटी राजेश गुप्ता को पुलिस कस्टडी से छुड़ाने व सरकारी काम में बाधा पहुंचाने के मामले की सुनवाई शनिवार को अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी शशि भूषण शर्मा की अदालत में हुई. राजेश गुप्ता की ओर से बचाव साक्षी सुधू भगत ने गवाही दी. उसने अदालत को बताया कि 12 मई 13 को साढ़े बारह बजे दिन में अपने घर पर था. पुलिस रामायण गुप्ता को पकड़ कर ले जा रही थी. वह बोला कि मैं राजेश गुप्ता नहीं हूं. बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता एसएन मुखर्जी व ललन किशोर प्रसाद ने साक्षी का मुख्य परीक्षण कराया. जबकि प्रतिपरीक्षण अभियोजन से सहायक लोक अभियोजक सोनी कुमारी ने की. यह घटना 12 मई 13 को निचितपुर में घटी थी.
सुदामडीह प्रभारी को शो-कॉज : अनुसूचित जाति उत्पीड़न व मारपीट के मामले में सुदामडीह पुलिस ने बबन दत्ता की जगह तपन दत्ता को गिरफ्तार कर एडीजे प्रथम पीयूष कुमार की अदालत में पेश किया. अदालत में तपन ने बताया कि मैं बबन दत्ता नहीं हूं. तब अदालत ने उसे रिमांड नहीं कर थाना को वापस कर जांच पड़ताल करने का निर्देश दिया. तपन दत्ता 20 जनवरी 18 को ही उस केस में रिहा हो चुका है. जबकि बबन दत्ता फरार है. बचाव पक्ष से अधिवक्ता अभय भट्ट ने सुदामडीह थानेदार को शो-कॉज करने का आग्रह किया. यह मामला जीआर केस नंबर 4070/09 से संबंधित है.
नीरज सिंह हत्याकांड : अमन और विनोद का डिस्चार्ज पिटीशन किया गया खारिज
पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह समेत चार लोगों की हत्या के मामले की सुनवाई शनिवार को जिला व सत्र न्यायाधीश चौदह आलोक कुमार दुबे की अदालत में हुई. जैनेंद्र सिंह उर्फ पिंटू सिंह की ओर से उसके अधिवक्ता जया कुमार ने बहस पूरी की. अदालत ने आदेश की तिथि 7 सितंबर मुकर्रर कर दी. वहीं शूटर अमन सिंह व रेकी करनेवाले विनोद सिंह के डिस्चार्ज पिटीशन को खारिज कर दिया. ज्ञात हो कि विनोद सिंह की ओर से अधिवक्ता सहदेव महतो व अमन सिंह की ओर से अधिवक्ता कुमार मनीष ने बहस की थी.
दूसरे जेल में न भेजने की गोपी खान की याचिका खारिज
अवैध विदेशी हथियार रखने के मामले में आरोपित जेल में बंद गोपी खान की ओर से दायर याचिका शनिवार को जिला व सत्र न्यायाधीश आलोक कुमार दुबे की अदालत ने खारिज कर दी. गोपी ने अदालत को आवेदन देकर आग्रह किया था कि मुझे राज्य के दूसरे जेल में सुरक्षा के दृष्टिकोण से नहीं भेजा जाये. बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने इस पर 27 अगस्त को बहस की थी. ज्ञात हो कि 5 दिसंबर 17 को संध्या 7 बजे वारंटी इकबाल खान की गिरफ्तारी के लिए तत्कालीन बैंक मोड़ थाना प्रभारी शमीम अहमद ने फहीम के घर में छापेमारी की थी. छापेमारी के दौरान पुलिस ने फहीम के घर से गोपी को गिरफ्तार किया था. पुलिस ने गोपी के कमरे से अवैध पिस्टल व गोली बरामद करने का दावा किया था.
रंगदारी के मामले में इकबाल, गॉडविन और बंटी की पेशी
रमजान मंजिल नया बाजार के सोहेब आलम से जमीन व मकान के बदले दस लाख रुपये रंगदारी मांगे जाने के मामले की सुनवाई शनिवार को न्यायिक दंडाधिकारी श्रुति सोरेन की अदालत में हुई. पुलिस ने कड़ी सुरक्षा के बीच जेल में बंद इकबाल खान, गॉडविन खान व बंटी खान को अदालत में पेश कराया. वहीं इम्तयाज खान, जो जमानत पर है, गैर हाजिर था. उसकी ओर से उसके अधिवक्ता ने प्रतिनिधित्व आवेदन दायर किया.
