रंजीत सिंह हत्याकांड की जांच करने धनबाद पहुंचे सीआइडी के आइजी

धनबाद : झारखंड विकास युवा मोर्चा धनबाद के जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह हत्याकांड की जांच के लिए सीआइडी के आइजी रंजीत प्रसाद व सीआइडी एसपी वाइएस रमेश गुरुवार को धनबाद पहुंचे. आइजी ने मामले में धनबाद पुलिस द्वारा अब तक की गयी कार्रवाई की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि घटना में शामिल अपराधियों की पहचान […]

धनबाद : झारखंड विकास युवा मोर्चा धनबाद के जिलाध्यक्ष रंजीत कुमार सिंह हत्याकांड की जांच के लिए सीआइडी के आइजी रंजीत प्रसाद व सीआइडी एसपी वाइएस रमेश गुरुवार को धनबाद पहुंचे. आइजी ने मामले में धनबाद पुलिस द्वारा अब तक की गयी कार्रवाई की समीक्षा की. उन्होंने कहा कि घटना में शामिल अपराधियों की पहचान धनबाद पुलिस द्वारा कर ली गयी है. जल्द ही परिणाम सामने आयेंगे. इस दिशा में कार्रवाई तेजी से की जा रही है. सीआइडी की ओर से धनबाद पुलिस को हर संभव मदद दी जायेगी.
बता दें कि मामले में रंजीत के बड़े भाई संजय सिंह के बयान पर गोंदुडीह ओपी में प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पुलिस पूछताछ कर रही है. गैंग्स ऑफ वासेपुर के प्रिंस खान एंड ब्रदर्स, गोधर के राजेश चौहान और बिट्टू रवानी सहित अन्य को आरोपी बनाया गया है. मामले में संभावना व्यक्त की जा रही है कि धनबाद पुलिस जल्द ही मामले का खुलासा नहीं करती है, तो मामला सीआइडी को सुपुर्द किया जा सकता है.
छापामारी जारी, गिरफ्तारी नहीं
हत्याकांड के दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस षड्यंत्रकारी व शूटर तक नहीं पहुंच पायी है. जबकि वह षड्यंत्रकारी व शूटरों की पहचान कर लेने का दावा कर रही है. पुलिस हत्या के षड्यंत्र में शामिल गैंग्स ऑफ वासेपुर के सदस्यों से कभी भी जेल में जाकर पूछताछ कर सकती है. पुलिस की एक टीम राजेश चौहान व बिट्टू रवानी की खोज में बिहार गयी है. रंजीत की हत्या के बाद से ही बिट्टू का मोबाइल बंद है. राजेश चौहान को तो आठ माह से पुलिस खोज रही है.
राजेश के संभावित ठिकानों झरिया, गोधर, केंदुआ, भूली समेत कई जगहों पर पुलिस ने दबिश दी है. पुलिस ने संदेह के आधार पर गोधर व वासेपुर से तीन युवकों को उठाया है. तीनों को गोपनीय स्थान पर रखकर पूछताछ की जा रही है. पुलिस ने बुधवार में हिरासत में लिये गये गैंग्स के युवकों को छोड़ दिया है. मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर पुलिस गैंग्स व रंगदारों से जुड़े दो दर्जन युवकों को निगरानी में रखी है. इन युवकों को बारी-बारी से बुलाकर पूछताछ की जा रही है. अनुसंधान प्रभावित होने के भय से पुलिस मामले में कुछ भी सार्वजनिक करने से बच रही है.
ग्रामीण एसपी ने संभाला मोर्चा
एसआइटी के प्रमुख होने के साथ ही ग्रामीण एसपी आशुतोष शेखर ने रंजीत हत्याकांड में मोर्चा संभाल लिया है. एसपी ने गुरुवार को एसआइटी में शामिल अफसर डीएसपी (लॉ एंड ऑर्डर) मुकेश कुमार, बैंक मोड़ थानेदार शमीम अहमद खान, कतरास थानेदार संजय कुमार, केंदुआडीह थानेदार परशुराम प्रसाद, गोंदुडीह थानेदार कमल किशोर बोंदिया, लोयाबाद थानेदार अमित गुप्ता व भूली अोपी प्रभारी प्रवीण कुमार के साथ बैठक कर अनुसंधान के लिए दिशा-निर्देश दिये. सभी अफसरों को अलग-अलग बिंदुओं पर जिम्मेदारी दी गयी है.
रंजीत को धमकी वाला फोन नंबर जेल में बंद भीम का!
बताया जा रहा है कि गैंग्स ऑफ वासेपुर के नाम से रंजीत को जिस फोन नंबर से धमकी दी जा रही थी वह जेल में बंद भीम सिंह के नाम से है. बैंक मोड़ पुलिस ने भीम को 27 मई को उसके सहयोगियों के साथ हथियार समेत दबोचा था. भीम सिंह (पिता विनय सिंह), अमित पासवान (पिता अर्जुन पासवान) व सूरज सिंह (पिता शंभू सिंह) तीनों नया धौड़ा कुस्तौर, थाना केंदुआडीह) को 27 मई को गिरफ्तार किया गया था. तीनों पल्सर बाइक पर सवार होकर केंदुआडीह से धनबाद स्टेशन की ओर आ रहे थे.
पुलिस तलाशी में भीम के पास से एक पिस्टल, दो जिंदा गोली, अमित के पास से एक पिस्टल दो जिंदा गोली मिली थी. तीनों ने पुलिस को बताया था कि राजेश चौहान के कहने पर उपेंद्र पर गोली चलायी थी. पिंटू ने अपने चचेरे भाई उपेंद्र की हत्या के लिए एक लाख रुपये देने की बात कही थी. हलांकि पिंटू ने 50 हजार रुपये ही दिये थे.
रंजीत के भाई व जख्मी मुन्ना एसएसपी से मिले, मांगा बॉडीगार्ड
रंजीत सिंह के बड़े भाई संजय कुमार सिंह व रंजीत के साथ गोलीबारी में जख्मी मुन्ना खान गुरुवार को एसएसपी मनोज रतन चोथे से मिले और जानमाल की सुरक्षा की गुहार लगायी. संजय ही रंजीत मर्डर केस में वादी हैं. मुन्ना खान केस का आइ विटनेश है. दोनों ने एसएसपी को अलग-अलग आवेदन देकर अंगरक्षक की मांग की है.

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