झरिया : अपराधियों की गोली के शिकार बने रंजीत सिंह बनियाहीर निवासी रामसेवक सिंह के द्वितीय पुत्र थे. उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत आरएसपी कॉलेज से छात्र नेता के रूप में की थी. छात्र रहते छात्रों के हित के लिए सदैव लड़ा. वे साधारण परिवार से होने के बावजूद छात्रों की समस्याओं को लेकर सदा सजग रहते थे. वर्ष 1997 में आरएसपी कॉलेज छात्र संघ के चुनाव में उपाध्यक्ष चुने गये थे.
संतोष सिंह अध्यक्ष बने. वर्ष 2000 में आनंद मोहन सिंह की पार्टी बिहार पीपुल्स पार्टी में संतोष सिंह के साथ सक्रिय हुए. उनकी उपलब्धियां व सक्रियता देख पूर्व मुख्यमंत्री व झाविमो सुप्रीमो बाबूलाल मरांडी काफी खुश हुए. वर्ष 2016 में बनियाहीर मैदान में बाबूलाल मरांडी की सभा में रंजीत सिंह हजारों छात्रों के साथ जेवीएम का दामन थामे. रंजीत सिंह की कर्तव्यनिष्ठा देख पार्टी सुप्रीमो ने उन्हें जेवीएम युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष बनाया. रंजीत के बड़े भाई संजय सिंह, तीसरे भाई राजेश सिंह व छोटे भाई संतोष सिंह हैं.
एक बहन उषा सिंह की शादी जमसं नेता योगेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र नवीन सिंह से हुई है. वह परिवार को एकसूत्र में बांधकर रखने का काम किये. अपनी व्यवहार कुशलता से लोगों के दिलों में जगह बनायी. कुसुंडा क्षेत्र में इनकी ट्रांसपोर्टिंग का काम चल रहा है. रंजीत सिंह बिहार के नालंदा जिला के भोलाबिगहा गांव मूल निवासी थे. बनियाहीर में तीन पीढ़ी से परिवार के लोग रह रहे हैं. उनके पिता रामसेवक सिंह बीमारी के कारण नहीं चल-फिर पाते हैं. रंजीत की पत्नी अंजली सिंह हैं. उनको दो पुत्रियां रूही कुमारी (12) व कुही (10) हैं.
रंजीत चार भाइयों में मांझिल थे. बड़े भाई संजय सिंह ट्रक चलवाते हैं.
राजेश सिंह का निजी व्यवसाय है. संतोष सिंह एम.टेक करने के बाद नौकरी कर रहे हैं.
बहन उषा देवी की शादी बस्ताकोला निवासी जमसं नेता योगेंद्र प्रताप सिंह के पुत्र नवीन सिंह से हुई है.
